पीलीभीत। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर और विख्यात वन्यजीव विशेषज्ञ साकेत बड़ौला ने बुधवार को पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रबंधन और यहाँ बाघों की बढ़ती संख्या की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। पीटीआर मुख्यालय पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि बेहतर प्रबंधन और शानदार ‘ग्रासलैंड’ (घास के मैदानों) ने यहाँ बाघों के कुनबे को बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। उन्होंने याद दिलाया कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व दुनिया का वह पहला रिजर्व है जिसे बाघों की संख्या दोगुनी करने के लिए प्रतिष्ठित ‘TX2’ अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया था। साकेत बड़ौला, जो इससे पूर्व ‘ट्रैफिक इंडिया’ के डायरेक्टर के रूप में वन्यजीव तस्करी रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, ने पीटीआर के विकास को लेकर अपना स्पष्ट विजन साझा किया।
साकेत बड़ौला ने एक बड़े टूरिस्ट सर्किट की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि दुधवा, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, जिम कॉर्बेट और राजाजी नेशनल पार्क को जोड़कर एक विशाल ‘इको-टूरिज्म सर्किट’ तैयार किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यटकों के लिए बाघ और तेंदुओं को देखना और भी आसान हो जाएगा। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें स्वयं भी बीते कल शाम पीटीआर में दो बाघों के दीदार हुए, जो यहाँ के सुखद वन्यजीव वातावरण का प्रमाण है। सुरई रेंज को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि सुरई पहले भी पीलीभीत से जुड़ा रहा है और इसे बफर जोन बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जिम कॉर्बेट और पीटीआर भविष्य में वन्यजीव संरक्षण के लिए साझा रणनीति पर काम करेंगे।
स्थानीय बुनियादी ढांचे पर चर्चा करते हुए साकेत बड़ौला ने स्वीकार किया कि फिलहाल यहाँ रिसॉर्ट्स और होमस्टे की कुछ कमी है, लेकिन जल्द ही इस दिशा में सुधार होगा जिससे स्थानीय समुदाय को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। उन्होंने पीलीभीत में आयोजित ‘दिव्य दर्शन’ कार्यक्रम की भी जमकर सराहना की और इसे संरक्षण व जन-जागरूकता की दिशा में एक अनुकरणीय पहल बताया। उन्होंने घोषणा की कि वे इस सफल मॉडल से प्रेरणा लेकर जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में भी ‘दिव्य दर्शन’ जैसे कार्यक्रम शुरू करने का प्रयास करेंगे। वन्यजीवों के शिकार को रोकने के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने पीटीआर के सुरक्षित भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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