सितारगंज (उधम सिंह नगर): सरकारी अस्पताल में तैनात डॉक्टर की कथित लापरवाही और निजी अस्पताल के साथ ‘साठगांठ’ के एक गंभीर मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है। प्रसव के 12 दिन बाद एक 24 वर्षीय प्रसूता की मौत के मामले में, न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने सितारगंज के आस्था अस्पताल के प्रबंधक और डॉ. नेहा सिद्दीकी समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल भेजने का खेल?

गांव पंडरी निवासी बक्शीश सिंह के अनुसार, 21 जुलाई को उनकी पुत्री काजल कौर को प्रसव पीड़ा होने पर उप जिला अस्पताल सितारगंज में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि वहां तैनात डॉ. नेहा सिद्दीकी ने सुविधाओं की कमी का हवाला देकर परिजनों को डराया और आधी रात को मरीज को निजी आस्था अस्पताल ले जाने का दबाव बनाया। 

लापरवाही की इंतहा: जड़ें फैलाता गया इन्फेक्शन

परिजनों का आरोप है कि आस्था अस्पताल में डॉ. नेहा और डॉ. जफर ने 26 हजार रुपये में ऑपरेशन तय किया और दवाओं के नाम पर अतिरिक्त वसूली की। ऑपरेशन के बाद माँ-बेटे की हालत बिगड़ती गई। प्रसूता को होश न आने पर उसे हल्द्वानी के सुशीला तिवारी और फिर देहरादून के हिमालयन अस्पताल रेफर किया गया। 

डॉक्टरों के मुताबिक, गलत इलाज के कारण प्रसूता के शरीर में इन्फेक्शन (Sepsis) फैल चुका था और नसें ब्लॉक हो गई थीं। आखिरकार, 3 अगस्त को इलाज के दौरान काजल ने दम तोड़ दिया। 

न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई

पीड़ित परिवार की शिकायत पर सुनवाई न होने के बाद मामला अदालत पहुंचा। सीओ बीएस धौनी ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर मंगलवार को संबंधित डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब मामले की गहनता से विवेचना कर रही है।

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