​​पीलीभीत | ​जनपद के भरा पचपेड़ा गांव में यूपीसीडा (उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निगम) और स्थानीय प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद सियासी और सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई है। मंगलवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी भाकपा माले का एक चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल प्रभावित क्षेत्र पहुँचा और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया। जांच दल ने सरकार से मांग की है कि गरीबों के घर उजाड़ने के बजाय उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाए।

मामला भरा पचपेड़ा स्थित गौशाला की लगभग दो हजार एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसे सरकार ने यूपीसीडा को हस्तांतरित कर दिया है। भाकपा माले के जिला सचिव कामरेड देवाशीष राय ने जांच रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि इस भूमि पर लगभग 179 भूमिहीन परिवार पिछले 40-50 वर्षों से बसे हुए हैं। उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं है। आरोप है कि प्रशासन ने 21 मार्च को पाँच घरों पर बुलडोजर चला दिया और शेष परिवारों को एक सप्ताह के भीतर वहां से हटने की चेतावनी दी है।
​सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल देवाशीष राय ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि औद्योगिक विकास गरीबों के आशियाने उजाड़कर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “योगी सरकार लोगों को बसाने के बजाय पूरे प्रदेश में उजाड़ने का काम कर रही है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन 179 परिवारों को दूसरी जगह बसाए बिना जबरन हटाया गया, तो भाकपा माले चुप नहीं बैठेगी और बड़े स्तर पर जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। प्रतिनिधिमंडल
पार्टी ने घोषणा की है कि इस गंभीर विषय और जमीनी तथ्यों से अवगत कराने के लिए कल एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मुलाकात करेगा। इस जांच दल में जिला सचिव देवाशीष राय के साथ जिला प्रभारी अफरोज आलम, एडवोकेट शम्स विकास और कामरेड सुभाष प्रमुख रूप से शामिल रहे। भाकपा माले ने प्रशासन से तत्काल दमनकारी कार्रवाई रोकने और मानवीय आधार पर समाधान निकालने की अपील की है।

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