विधि संवाददाता,​पीलीभीत। जनपद के बहुचर्चित अनिल पाल हत्याकांड में सोमवार को एक महत्वपूर्ण विधिक मोड़ आया, जब सत्र न्यायालय ने मुख्य अभियुक्ता निधि मिश्रा की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। यह आदेश माननीय सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) रविन्द्र कुमार द्वारा 23 मार्च 2026 को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद पारित किया गया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि मृतक अनिल पाल को सुनियोजित षड्यंत्र के तहत पहले जहरीला पदार्थ दिया गया और उसके उपरांत साक्ष्यों को मिटाने व घटना को आत्महत्या का रूप देने के उद्देश्य से शव को फांसी पर लटका दिया गया। मामले में अवैध संबंधों के कोण को भी अभियोजन द्वारा प्रमुखता से रेखांकित किया गया।
​सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट (PMR) का हवाला देते हुए बताया कि मृतक के शरीर में जहर के लक्षण पाए गए हैं, जिसके चलते विसरा सुरक्षित कर विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) जांच हेतु भेजा गया है। न्यायालय ने माना कि मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है और वर्तमान में जांच लंबित होने के कारण अभियुक्ता को जमानत देना साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना को जन्म दे सकता है। हालांकि, बचाव पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए मामले को आत्महत्या करार दिया, किंतु प्रथम दृष्टया अभियुक्ता की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर न्यायालय ने अग्रिम राहत देने से इनकार कर दिया। इस अदालती आदेश के बाद अब पुलिस की अगली कार्रवाई और विसरा रिपोर्ट के परिणामों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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