पीलीभीत। नगर पालिका परिषद पीलीभीत की कार्यप्रणाली से जुड़ी हाईकोर्ट याचिका के मामले में नया मोड़ सामने आया है। शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे कई सभासदों ने याचिका के संबंध में अनभिज्ञता जताते हुए आरोप लगाया कि उनके हस्ताक्षरों का इस्तेमाल उनकी जानकारी और सहमति के बिना किया गया। सभासदों ने वर्ष 2025 में विभिन्न शिकायतों के लिए कराए गए हस्ताक्षरों को स्कैन कर याचिका में इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई और मामले की जांच की मांग की।
दरअसल, सभासद पुष्पा उपाध्याय एवं अन्य की ओर से 8 जून 2026 को नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली से संबंधित 17 बिंदुओं पर जिलाधिकारी को शिकायती प्रार्थना पत्र दिया गया था। जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व)/प्रभारी अधिकारी स्थानीय निकाय ने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका से अभिलेखीय साक्ष्यों सहित जांच आख्या मांगी थी। इसके बाद सभासद पुष्पा उपाध्याय की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका संख्या 30497/2026 दाखिल की गई।
हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को दिए थे निर्णय लेने के निर्देश
मामले में 11 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए जिलाधिकारी पीलीभीत को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता के 8 जून के प्रत्यावेदन पर विचार कर आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो माह के भीतर निर्णय लिया जाए। इसके अनुपालन में जिला प्रशासन ने प्रकरण की जांच के लिए संयुक्त जांच समिति गठित की। समिति में एसडीएम (न्यायिक), लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड, जल निगम नगरीय और विद्युत विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया।
इस बीच अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद की ओर से 17 बिंदुओं पर अभिलेखीय साक्ष्यों सहित जांच आख्या 8 अक्टूबर को अपर जिलाधिकारी को भेजी गई। इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से 27 अक्टूबर को जारी पत्र के माध्यम से संबंधित सभासदों को 31 अक्टूबर को अपना पक्ष और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया।
सभासदों ने दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग पर उठाए सवाल
शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे सभासदों ने अपने पक्ष में कहा कि उन्हें हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका के संबंध में जानकारी नहीं थी। उनका आरोप है कि वर्ष 2025 में कुछ शिकायतों के संबंध में जिन दस्तावेजों और कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए थे, उन्हीं हस्ताक्षरों को स्कैन कर बाद में उनकी जानकारी और सहमति के बिना इस्तेमाल किए जाने की आशंका है।
सभासदों ने यह भी बताया कि नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. आस्था अग्रवाल, अधिशासी अधिकारी और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ पूर्व में की गई शिकायतों के संबंध में बाद में उन्हें संबंधित अभिलेख दिखाए गए थे। उनके अनुसार, इसके बाद उनकी गलतफहमियां दूर हो गई थीं और वे उन शिकायतों पर अब कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। सभासदों ने अधिशासी अधिकारी की ओर से 8 अक्टूबर को प्रस्तुत जांच आख्या पर भी सहमति जताई।

याचिका से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग
सभासदों ने अपने प्रस्तावित लिखित पक्ष में आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के साथ संलग्न शिकायती प्रार्थना पत्र की प्रति और जिलाधिकारी को भेजे गए मूल शिकायती पत्र की प्रति में अंतर है। उन्होंने हस्ताक्षरों और दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग की जांच कर संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
लिखित बयान मिलने के बाद होगी आगे की कार्रवाई
मामले में अपर जिलाधिकारी प्रसून द्विवेदी ने सभासदों से अपना पक्ष और बयान लिखित रूप में प्रस्तुत करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभासदों के लिखित बयान प्राप्त होने के बाद उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल हस्ताक्षरों के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।