विधि संवाददाता,​पीलीभीत। थाना अमरिया क्षेत्र के अंतर्गत वर्ष 2018 में युवती की हत्या कर शव छिपाने के बहुचर्चित मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट शिप्रा सिंह ने एक महत्वपूर्ण और कड़ा आदेश पारित किया है। अदालत ने पुलिस द्वारा दो बार दाखिल की गई अंतिम रिपोर्ट (फाइनल रिपोर्ट) को वादनी की आपत्ति और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद निरस्त कर दिया है और आरोपी रामगोपाल को हत्या के मामले में दोषी मानते हुए तलब किया है। इसके साथ ही, विवेचना में गंभीर लापरवाही बरतने पर विवेचक मिराज अली और पर्यवेक्षण अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए डीजीपी (उत्तर प्रदेश) व डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (पीलीभीत) को पत्र भेजने का भी आदेश दिया गया है।
​प्रकरण के अनुसार, थाना अमरिया क्षेत्र के ग्राम कैचुटांडा निवासी छद्म्मी लाल की पत्नी शीला देवी ने अमरिया थाने में सूचना दर्ज कराई थी कि उनकी पुत्री शिवानी, जो 26 जुलाई 2018 को डॉक्टर मेजर सिंह की अमरिया स्थित दुकान पर काम करती थी, घर वापस नहीं लौटी। बाद में यह जानकारी मिली कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसका अपहरण कर लिया है, जिस पर गुमशुदगी के मुकदमे को अपहरण में तरमीम किया गया। विवेचना के दौरान थाना अमरिया पुलिस ने ग्राम सरेंदा पट्टी निवासी रामगोपाल को गिरफ्तार किया तथा उसकी निशानदेही पर शिवानी का शव व मोबाइल बरामद कर उसे जेल भेज दिया था।
​हालांकि, इसके बाद विवेचक द्वारा मामले में अंतिम रिपोर्ट (फाइनल रिपोर्ट) न्यायालय में दाखिल कर दी गई, जिसके आधार पर न्यायालय ने जिला कारागार पीलीभीत को आदेश भेजा कि यदि आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित न हो तो उसे रिहा कर दिया जाए, और रामगोपाल जेल से छूट गया। अंतिम रिपोर्ट पर अदालत द्वारा वादनी को नोटिस जारी किए जाने पर वादनी ने प्रोटेस्ट (आपत्ति) दाखिल की, जिस पर न्यायालय ने पुनः विवेचना का आदेश दिया। इसके बावजूद विवेचक द्वारा दोबारा अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल कर दी गई। वादनी ने अधिवक्ता भगवान दास शर्मा के माध्यम से इस पर पुनः प्रोटेस्ट (आपत्ति) दाखिल कराई।
​न्यायालय ने पत्रावली का बारीकी से अवलोकन करने के बाद अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर दिया और आरोपी रामगोपाल को हत्या का दोषी पाते हुए तलब करने का आदेश दिया। अदालत ने अपने आदेश में यह भी टिप्पणी की कि विवेचक मिराज अली द्वारा त्रुटिपूर्ण विवेचना की गई है और पर्यवेक्षण अधिकारी द्वारा इस त्रुटिपूर्ण विवेचना को सहन किया गया, जो कि अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इसी के मद्देनजर न्यायालय ने आदेश की एक प्रति विवेचक मिराज अली व पर्यवेक्षण अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई हेतु डीजीपी उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी पीलीभीत को भेजने के निर्देश दिए।
​न्यायालय से सम्मन, जमानती वारंट और गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बावजूद जब आरोपी रामगोपाल अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, तो न्यायालय ने उसके खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए गिरफ्तारी वारंट और सीआरपीसी की धारा 83 के तहत कुर्की की कार्रवाई करने का आदेश पारित किया है तथा मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 नवंबर की तिथि नियत की है।

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