पीलीभीत। बीसलपुर के एक युवक की ओर से लगाए गए लूट, फिरौती मांगने और वाहन चालक को कथित रूप से फर्जी मुकदमे में जेल भेजने के आरोपों से जुड़े मामले में अदालत ने पुलिस उपनिरीक्षक राकेश कुमार यादव को समन जारी किया है। अपर सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) रामकिशोर की अदालत ने परिवाद और उपलब्ध बयानों का अवलोकन करने के बाद उन्हें आगामी सुनवाई पर उपस्थित होने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई है।
पेट्रोल भरवाने के दौरान रुपये लेने का आरोप
मोहल्ला दुबे बस्ती, बीसलपुर निवासी आकाश ने अदालत में परिवाद दाखिल कर आरोप लगाया कि 21 अगस्त 2025 की रात करीब नौ बजे उपनिरीक्षक राकेश कुमार यादव तीन अन्य पुलिसकर्मियों के साथ उसके पास पहुंचे थे। शिकायत के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने कहा कि उसकी गाड़ी से हुए हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है और वाहन की जांच करनी है।
वादी के मुताबिक, वह पुलिसकर्मियों को वाहन चालक सद्दाम हुसैन के घर ले गया, जहां ईको गाड़ी खड़ी थी। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने वाहन में पेट्रोल भरवाने को कहा, लेकिन भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही उससे 6,320 रुपये ले लिए। विरोध करने पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उसे गाड़ी से नीचे धकेलने और चालक सद्दाम व ईको वाहन को अपने साथ ले जाने का भी आरोप लगाया गया है।
एक लाख रुपये फिरौती मांगने का आरोप
आकाश ने अपने परिवाद में आरोप लगाया कि 27 अगस्त 2025 को दरोगा आर.के. यादव ने फोन कर वाहन और चालक को छोड़ने के बदले एक लाख रुपये देने की मांग की। शिकायत के अनुसार, रुपये देने से इनकार करने पर उसे और चालक को झूठे मुकदमे में जेल भेजने तथा वाहन का चालान करने की धमकी दी गई।
वादी का यह भी आरोप है कि इसके बाद हरदोई जिले के शाहबाद क्षेत्र के अल्लाहपुर इबनेजाई से संबंधित कथित फर्जी तहरीर के आधार पर ईको वाहन का चालान किया गया और चालक सद्दाम को बकरी चोरी के मुकदमे में जेल भेज दिया गया।
अदालत ने जारी किया समन
परिवाद के अनुसार, अदालत ने वादी और गवाहों के बयान दर्ज करने तथा पत्रावली में उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करने के बाद उपनिरीक्षक राकेश कुमार यादव को संबंधित आरोपों के मामले में समन जारी किया है। दी गई जानकारी के मुताबिक, मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 140 और 309 तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) का उल्लेख किया गया है।
अदालत ने संबंधित उपनिरीक्षक को 20 अक्टूबर को उपस्थित होने का आदेश दिया है। मामले में आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। समन जारी होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है; आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय की आगे की कार्यवाही के बाद ही होगा।