विधि संवाददाता, पीलीभीत। मुक़दमे में अपने पक्ष में गवाही देने से इंकार करने पर घर में घुसकर गवाह पर जानलेवा हमला करने और उसे गंभीर रूप से घायल करने के मामले में न्यायपालिका ने सख्त रुख अपनाया है। जनपद सत्र न्यायाधीश रविन्द्र कुमार की अदालत ने मामले की गंभीरता और अपराध की प्रकृति को देखते हुए आरोपी मदन लाल की नियमित जमानत याचिका को सुनवाई के बाद निरस्त कर दिया है।
अभियोजन कथानक के अनुसार, मामला थाना बीसलपुर क्षेत्र के ग्राम परासी रामकिशन से जुड़ा हुआ है। पीड़िता गुड्डी देवी (पत्नी देवदत्त) ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि पूर्व में उनके पुत्र अमित कुमार के साथ हुई मारपीट के मामले में आरोपी झंकारी, जितेंद्र और मदन लाल के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में आरोपी पक्ष लगातार पीड़िता के पति देवदत्त पर अपने पक्ष में गवाही देने का अनुचित दबाव बना रहा था। दबाव में न आने और गवाही देने पर अड़े रहने के कारण आरोपियों ने वर्ष 2025 में भी जान से मारने की नियत से मारपीट की घटना को अंजाम दिया था।
इसके उपरांत, अदालत में 25 जून 2026 को देवदत्त की पुनः गवाही नियत थी। गवाही से ठीक एक दिन पहले 24 जून 2026 को आरोपी मदन लाल अपने अन्य साथियों के साथ हाथों में बंका, डंडे व अन्य घातक हथियार लेकर पीड़िता के घर में जबरन घुस आए और देवदत्त पर जान से मारने की नियत से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस हमले में देवदत्त गंभीर रूप से घायल हो गए। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने संगीन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्यवाही शुरू की।
प्रकरण में जेल में बंद आरोपी मदन लाल की ओर से जनपद सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में नियमित जमानत हेतु प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) महेंद्र पाल गंगवार ने तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि आरोपी आदतन अपराधी हैं और न्याय की प्रक्रिया को बाधित करने के उद्देश्य से गवाह पर बार-बार जानलेवा हमला कर रहे हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना, केस डायरी व पत्रावली का गहनता से अवलोकन किया और मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए आरोपी मदन लाल की जमानत याचिका खारिज करने का आदेश पारित किया।