सितारगंज। जनपद ऊधमसिंह नगर में साइबर अपराधों की रोकथाम और आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अजय गणपति के कुशल निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक नगर व क्षेत्राधिकारी सितारगंज के नेतृत्व में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सितारगंज कोतवाली पुलिस को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से देशव्यापी साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रहे संदिग्ध बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई थी। इस डिजिटल इनपुट के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए कोतवाली पुलिस ने संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े 12 स्थानीय खाताधारकों को थाने बुलाकर गहन पूछताछ की।
पुलिस की प्राथमिक पूछताछ और वित्तीय ऑडिट में यह तथ्य प्रकाश में आया कि पूछताछ के लिए बुलाए गए अधिकांश नागरिक ‘In Coin’, ‘X-Wallet’, ‘Teen Patti’, ‘Cedar Pay’, ‘Top Pay’, ‘One Pay’ एवं ‘Super Pay’ जैसी देश में प्रतिबंधित और अनऑथराइज्ड ऑनलाइन गेमिंग व शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट एप्लिकेशनों के जाल में फंसे हुए थे। ये लोग अधिक और त्वरित मुनाफे के लालच में इन अवैध प्लेटफॉर्म्स पर अपनी धनराशि का निवेश कर रहे थे। तकनीकी जांच में सुरक्षा एजेंसियों ने पाया कि साइबर अपराधी (हैकर और ठग) इन निवेशकों की मूल वैध धनराशि को अवैध रूप से अपने मुख्य खातों में ट्रांसफर कर लेते हैं, और बदले में देश के अन्य निर्दोष नागरिकों से की गई साइबर ठगी (लॉटरी फ्रॉड, लोन फ्रॉड आदि) की काली कमाई को इन स्थानीय निवेशकों के बैंक खातों में क्रेडिट कर देते हैं। इस जटिल प्रक्रिया के कारण स्थानीय खाताधारक पूरी तरह अनजाने में ही साइबर अपराध की एक बड़ी आपराधिक कड़ी (मनी लॉन्ड्रिंग लेयर) का हिस्सा बन जाते हैं।
कोतवाली सितारगंज पुलिस ने इस मामले में विधिक प्रक्रिया के तहत सभी 12 खाताधारकों के आधिकारिक बयान दर्ज किए हैं। पुलिस प्रशासन ने आम जनता से बेहद कड़े शब्दों में अपील की है कि किसी भी प्रकार की ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी या अनऑथराइज्ड लोन व अर्निंग ऐप्स पर पैसे लगाने के लालच से पूरी तरह दूर रहें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी व्यक्ति ऐसे अवैध प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देता है या उसमें संलिप्त पाया जाता है, तो केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से उसका बैंक खाता तुरंत फ्रीज (सीज) कर दिया जाएगा, संबंधित सिम और मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, यदि जांच में किसी की भी जानबूझकर की गई संलिप्तता या कमीशनखोरी उजागर होती है, तो उसके विरुद्ध सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत वैधानिक दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए जेल भेजा जाएगा।