ललितपुर। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल में स्थित ललितपुर जनपद की सदर तहसील परिसर से प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को बयां करने वाली एक अत्यंत हृदयविदारक और सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई है। यहाँ अपनी भूमि और राजस्व संबंधी जायज शिकायतों पर स्थानीय राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा लगातार की जा रही हीला-हवाली और कोई विधिक कार्रवाई न होने से व्यथित होकर एक पीड़ित किसान ने सरेआम सदर तहसील परिसर के भीतर फांसी लगाकर आत्महत्या करने का दुस्साहसिक प्रयास किया। इस जानलेवा प्रयास को देखकर मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं और वादकारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई, जिन्होंने सूझबूझ का परिचय देते हुए तत्काल किसान को फंदे से नीचे उतारा और अचेत अवस्था में अस्पताल पहुँचाया।

घटना के संदर्भ में प्राप्त विवरण के अनुसार, पीड़ित किसान अपनी पैतृक जमीन के विवाद और अवैध कब्जे को लेकर पिछले कई महीनों से सदर तहसील और जिलाधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रहा था। मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल और संपूर्ण समाधान दिवस में बार-बार लिखित शिकायतें दर्ज कराने के उपरांत भी जब स्थानीय लेखपाल और राजस्व निरीक्षक द्वारा कोई न्यायोचित कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई, तो हताश होकर उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। इस अत्यंत दुखद घटना की सूचना जब अस्पताल के बाहर खड़े उसके सगे छोटे भाई को मिली, तो वह अपने भाई की मरणासन्न स्थिति और गहरे मानसिक सदमे को सहन नहीं कर सका। उसने भी रोते-बिलखते हुए जेब से निकालकर जहरीला पदार्थ खा लिया, जिससे जिला अस्पताल परिसर के भीतर ही कोहराम मच गया।

डॉक्टरों ने दोनों सगे भाइयों की स्थिति को अत्यंत नाजुक और गंभीर देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें तत्काल झांसी मेडिकल कॉलेज के आईसीयू (ICU) वार्ड के लिए रेफर कर दिया है, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी लगातार मॉनिटरिंग कर रही है।


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