नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र और भारत की विशाल समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, देश की समुद्री रक्षा प्रणाली को अत्यधिक शक्तिशाली बनाने के लिए पिछले महज एक महीने के भीतर रिकॉर्ड समय में चार नई खेप के अत्याधुनिक स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफार्मों को भारतीय नौसेना के बेड़े में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी अल्पावधि में चार बड़े और हाई-टेक नौसैनिक युद्धक प्लेटफार्मों को नौसेना का हिस्सा बनाना वैश्विक रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और तकनीकी मुस्तैदी का एक बहुत बड़ा प्रमाण है।

इस नई रक्षा खेप के तहत शामिल किए गए युद्धपोतों में सबसे प्रमुख आकर्षण और नौसेना की नई ताकत नवीनतम युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरी (INS Mahendragiri) बना है। आईएनएस महेंद्रगिरी स्वदेशी रूप से डिजाइन और पूरी तरह भारत में निर्मित किया गया छठा नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) का अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट है। इस बेहद एडवांस युद्धपोत को इसी महीने की 11 तारीख को एक भव्य समारोह के दौरान भारतीय नौसेना के बेड़े में देश की सेवा के लिए समर्पित किया गया था। यह फ्रिगेट अत्याधुनिक रडार-इवेडिंग (रडार की पकड़ में न आने वाली) स्टील्थ विशेषताओं, उन्नत हथियारों, सेंसरों और मजबूत प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है, जो इसे आधुनिक समुद्री युद्ध के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक जहाजों में से एक बनाता है। [1]

सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, भारतीय नौसेना के युद्धक जहाजों के बेड़े में शामिल किए गए ये सभी चारों प्लेटफॉर्म पूरी तरह से स्वदेशी तकनीकी और भारतीय डिजाइनरों द्वारा विकसित किए गए हैं। नीलगिरी श्रेणी के इस छठे स्टील्थ फ्रिगेट के आने से नौसेना की मल्टी-मिशन वॉरफेयर (बहु-आयामी युद्ध) क्षमता में अभूतपूर्व इजाफा हुआ है। यह युद्धपोत न केवल समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने में सक्षम है, बल्कि हवा से आने वाली मिसाइलों और समुद्र के भीतर छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों का शिकार करने के लिए भी अत्याधुनिक एंटी-सबमरीन व एंटी-एयरक्राफ्ट हथियारों से लैस है। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मात्र एक महीने में इतनी बड़ी खेप को शामिल करना हिंद महासागर में चीनी नौसेना की बढ़ती संदिग्ध गतिविधियों का मुकाबला करने के रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण कदम है। [1]

नौसेना प्रमुख और वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने इन नए प्लेटफार्मों के सफल समावेशन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह कदम भारतीय नौसेना को एक ‘बिल्डर्स नेवी’ (जहाज बनाने वाली नौसेना) के रूप में स्थापित करने के देश के विजन को मजबूती प्रदान करता है। भारत वर्तमान में अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए पूरी तरह स्वदेशी युद्धपोतों, विमानवाहकों और पनडुब्बियों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे न केवल विदेशी निर्भरता कम हो रही है, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी अरबों रुपये का बढ़ावा मिल रहा है। इन अत्याधुनिक लड़ाकू प्रणालियों के बेड़े में शामिल होने से अब देश की तटीय सुरक्षा और सुदूर समुद्री क्षेत्रों में भारतीय नौसेना की रणनीतिक पैठ पहले से कई गुना अधिक मजबूत और अचूक हो गई है।

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