देहरादून (12 जुलाई 2026)। उत्तराखंड में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के दृष्टिगत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी चुनावी और सांगठनिक तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। रविवार को राजधानी देहरादून के एक निजी होटल में भाजपा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय संगठनात्मक समीक्षा बैठक प्रारंभ हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य अतिथि और रणनीतिकार के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं उत्तराखंड प्रभारी तरुण चुग सम्मिलित हुए हैं। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है, जिसमें सरकार और संगठन के मध्य समन्वय को लेकर विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

कैबिनेट मंत्री, सांसद और विधायक बैठक में मौजूद, परफॉर्मेंस पर चर्चा
प्राप्त प्रामाणिक और विधिक जानकारी के अनुसार, इस महा-मंथन में राज्य सरकार के सभी कैबिनेट मंत्री, प्रदेश के लोकसभा व राज्यसभा सांसद, समस्त विधायक तथा पार्टी के वरिष्ठ कोर कमेटी के सदस्य मुख्य रूप से प्रतिभाग कर रहे हैं। बैठक का मूल एजेंडा आगामी विधानसभा चुनावों से पूर्व संगठन की सक्रियता को बूथ स्तर तक बढ़ाना है। राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने बैठक के प्रथम सत्र में जनप्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों से सीधे संवाद करते हुए सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने की विधिक समीक्षा की। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व द्वारा सभी विधायकों और मंत्रियों को उनके क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाने और जनता के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने के कड़े निर्देश दिए जा रहे हैं।

एसआईआर (SIR) और क्षेत्रीय नीतिगत मुद्दों पर विधिक विचार-विमर्श
सांगठनिक विषयों के अतिरिक्त, इस उच्च स्तरीय बैठक में उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य के आर्थिक विकास और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए लाए गए ‘एसआईआर’ (Special Investment Region – विशेष निवेश क्षेत्र) कानून सहित कई अन्य ज्वलंत और नीतिगत मुद्दों पर भी गहनता से विचार-विमर्श किया जा रहा है। सरकार और संगठन के प्रबुद्ध नेता इस बात की रणनीति बना रहे हैं कि विपक्ष द्वारा एसआईआर को लेकर फैलाए जा रहे विमर्श को विधिक व राजनीतिक रूप से कैसे काउंटर किया जाए और जनता को इसके दूरगामी आर्थिक लाभों से अवगत कराया जा सके। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह बैठक राज्य के सर्वांगीण विकास और सुशासन के विधिक संकल्पों को धरातल पर उतारने तथा आगामी चुनावी रण में ऐतिहासिक बहुमत हासिल करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।


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