नई टिहरी। उत्तराखंड के जिला मुख्यालय नई टिहरी में कथित रूप से नियमों के विरुद्ध किए गए भारी भू-कटान के कारण लोक निर्माण विभाग के सरकारी फ्लैटों और उनमें निवास कर रहे दर्जनों परिवारों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। अनियंत्रित खुदाई के चलते संबंधित क्षेत्र में भारी भू-धंसाव की स्थिति पैदा हो गई है। जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा बैरिकेडिंग लगाकर आम लोगों की आवाजाही पर पूर्ण रोक लगा दी है। इसके साथ ही, सरकारी फ्लैटों में रह रहे प्रभावित परिवारों को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की विधिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
खुदाई से प्रभावित हुई सरकारी फ्लैटों की नींव, रसूखदारों पर आरोप
प्राप्त प्रामाणिक और आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नई टिहरी के प्रतिष्ठित ब्लॉक-सी स्थित भूखंड संख्या पी-06 और पी-07 पर पिछले कुछ समय से अत्यधिक व अनियंत्रित कटान किया जा रहा था, जिसके परिणामस्वरूप यह भारी भू-धंसाव हुआ है। राजस्व अभिलेखों के मुताबिक, संबंधित विवादित भूखंड पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण की पत्नी अंबिका सजवाण द्वारा क्रय किए गए हैं, जबकि वह मूल विस्थापित पात्रता की श्रेणी में नहीं आती हैं। प्रशासन का तकनीकी आकलन है कि इस भूखंड पर व्यावसायिक या निजी विकास कार्यों के लिए कराई गई गहरी खुदाई के कारण ठीक ऊपर स्थित सरकारी आवासों (फ्लैटों) की नींव विस्थापित और कमजोर हो गई है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है।
न्यायालय के आदेश पर लोक निर्माण विभाग ने शुरू किया सुरक्षा दीवार का निर्माण
इस गंभीर मामले में सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार बनाम अंबिका सजवाण पत्नी शूरवीर सिंह सजवाण के विरुद्ध परगना मजिस्ट्रेट न्यायालय, टिहरी गढ़वाल में वाद संख्या 02/2026 के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 152 के अंतर्गत विधिक वाद दायर किया गया है। परगना मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेशों के अनुपालन में लोक निर्माण विभाग (प्रांतीय खंड), नई टिहरी के अधिशासी अभियंता के सीधे निर्देशन में खतरे को टालने के लिए युद्धस्तर पर सुरक्षा दीवार (रिटेनिंग वॉल) का निर्माण कार्य प्रारंभ करा दिया गया है। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ों पर पर्यावरण और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले भू-कटान के खिलाफ विधिक नियमों के तहत कड़ी अग्रिम दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।