विधि संवाददाता, पीलीभीत। पंजाब एंड सिंध बैंक की टनकपुर बाईपास रोड शाखा में खाताधारक के खाते से फर्जी तरीके से 7 करोड़ 82 लाख 15 हजार रुपये निकालने के मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार हिमांशु ने मामले को बेहद गंभीर प्रवृत्ति का मानते हुए तत्कालीन शाखा प्रबंधक (बैंक मैनेजर) राधेश्याम प्रभाकर की अग्रिम जमानत याचिका को सुनवाई के बाद निरस्त कर दिया है।
लोन टेकओवर और लिमिट बढ़ाने के नाम पर बुना जाल
अभियोजन कथानक के अनुसार, थाना कोतवाली क्षेत्र के हाल निवासी के.जी.एन.-2 सिविल लाइंस नॉर्थ के मोहम्मद जीशान ने न्यायालय के आदेश पर थाना सुनगढ़ी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जीशान थाना अमरिया के ग्राम उदयपुर माफी दियुनीडाम रोड पर स्थित ‘मैसर्स उजेफा एग्रीटेक राइस मिल’ के स्वामी व प्रोप्राइटर हैं। उनकी राइस मिल का कैश लिमिट खाता टनकपुर रोड स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक की शाखा में है, जिसका संचालन वह खुद करते हैं। जून 2024 में बैंक द्वारा उन्हें 10 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत किया गया था। इससे पहले उनका लोन खाता इंडियन बैंक पीलीभीत में चल रहा था। आरोप है कि पंजाब एंड सिंध बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक राधेश्याम प्रभाकर ने उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन देकर और दबाव बनाकर इंडियन बैंक का खाता बंद करने पर मजबूर किया। शाखा प्रबंधक ने इंडियन बैंक की एनओसी व अन्य औपचारिकताओं और बिना टेकओवर प्रक्रिया पूर्ण किए ही 10 करोड़ का लोन उनकी फर्म के नाम स्वीकृत कर दिया, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसके बाद लोन लिमिट को 25 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का झांसा देकर मैनेजर ने जीशान का विश्वास जीत लिया।
व्हाट्सएप पर मंगाए बिना हस्ताक्षरित चेक, फिर कर डाला करोड़ों का वारा-न्यारा
शाखा प्रबंधक राधेश्याम प्रभाकर ने लोन लिमिट बढ़ाने और सिक्योरिटी का बहाना बनाकर मोहम्मद जीशान के मोबाइल से व्हाट्सएप के माध्यम से 6 मई 2025 से 23 जनवरी 2026 तक विभिन्न तिथियों में करीब 20 बिना हस्ताक्षरित (अनसाइंड) चेकों के फोटो अपने मोबाइल पर मंगाए। आरोप है कि शाखा प्रबंधक ने अपने बैंक कर्मचारियों व अन्य अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलीभगत करके फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद व्हाट्सएप पर भेजे गए चेकों की छायाप्रतियों (फोटो) का इस्तेमाल कर, खाताधारक की बिना सहमति और बिना किसी ट्रांसफर अनुमति के, 4 करोड़ 15 लाख 50 हजार रुपये नकद निकाल लिए। जब पीड़ित ने इसकी शिकायत शाखा प्रबंधक और बैंक के उच्च अधिकारियों से की, तो मैनेजर ने आश्वासन दिया कि वह कुछ दिनों में रुपये खाते में वापस जमा कर देगा। पीड़ित ने जब बैंक में आवेदन देकर वाउचर डिटेल, चेकों की प्रतियां और अन्य बैंक रिकॉर्ड मांगे, तो शाखा प्रबंधक और कर्मचारियों ने कागजात दिखाने व उनकी नकल देने से साफ मना कर दिया।
जांच में सामने आया 7.82 करोड़ का गबन, कोर्ट ने माना गंभीर अपराध
पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर जब मामले की विवेचना शुरू की, तो परतें खुलती चली गईं। शाखा प्रबंधक राधेश्याम प्रभाकर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता विमल कुमार वर्मा ने न्यायालय के समक्ष मजबूत पैरवी की। उन्होंने बताया कि पुलिस विवेचना के दौरान वादी मोहम्मद जीशान और उनकी पत्नी के खातों से कुल 38 चेकों के माध्यम से 7 करोड़ 82 लाख 15 हजार रुपये की भारी-भरकम धनराशि धोखाधड़ी कर निकालने का मामला प्रकाश में आया है। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अवलोकन करने के बाद, आर्थिक अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी बैंक मैनेजर राधेश्याम प्रभाकर की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।