​पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) और उसके आस-पास के संवेदनशील क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने तथा स्थानीय समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित बाघ मित्रों का तीन दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण में मेजबान पीलीभीत के अलावा दुधवा टाइगर रिजर्व, उत्तर खीरी, दक्षिण खीरी तथा वन एवं वन्य जीव प्रभाग बिजनौर के चयनित बाघ मित्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रशिक्षण के अंतिम और तीसरे दिन सभी प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान और जमीनी वास्तविकताओं से रूबरू कराने के लिए एक विस्तृत शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाया गया, जहाँ उन्होंने पीलीभीत टाइगर रिजर्व के सीमावर्ती गाँवों में चल रही विभिन्न विकासपरक और पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया।


​शैक्षणिक भ्रमण के दौरान बाघ मित्रों के दल को मुख्य रूप से ग्राम पंचायत पुरैना का दौरा कराया गया, जहाँ उन्होंने महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार की दिशा में किए जा रहे अभूतपूर्व प्रयासों को देखा। यहाँ महिलाओं के आत्मनिर्भर समूहों द्वारा शुद्ध शहद के उत्पादन और मोरिंगा (सहजन) की खेती व उसके प्रसंस्करण से जुड़े कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर जलकुंभी की समस्या को रोजगार के अवसर में बदलते हुए महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे विशेष प्रशिक्षण और उनके द्वारा बनाए जा रहे आकर्षक हस्तनिर्मित उत्पादों को देखकर सभी बाघ मित्र अत्यंत प्रभावित हुए। वनों पर स्थानीय आबादी की निर्भरता कम करने के लिए आजीविका के ऐसे मजबूत साधन विकसित करना कितना महत्वपूर्ण है, इसका प्रत्यक्ष अनुभव प्रतिभागियों को इस दौरे से मिला।


​ग्राम भ्रमण के दौरान बाघ मित्रों ने मानव-वन्यजीव संघर्ष निवारण हेतु जमीनी स्तर पर चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की कार्यप्रणाली को भी करीब से समझा। इस दौरान ‘बाघ एक्सप्रेस’ के माध्यम से ग्रामीणों को सजग करने के लिए आयोजित विशेष कार्यक्रम का अवलोकन किया गया, जिसमें यह प्रदर्शित किया गया कि हिंसक वन्यजीवों के आबादी क्षेत्र में आने पर ग्रामीणों को किस प्रकार संयमित व्यवहार करना चाहिए और वन विभाग के साथ कैसे त्वरित समन्वय स्थापित करना चाहिए।


​इस अनूठे प्रशिक्षण का एक अन्य मुख्य आकर्षण स्थानीय सांस्कृतिक विविधता से परिचय रहा। बाघ मित्रों को क्षेत्र की समृद्ध बंगाली संस्कृति से रूबरू कराने के लिए गाँव में स्थित होम स्टे और बंगाली परिवारों के बीच ले जाया गया, जहाँ उन्होंने उनकी जीवनशैली, वन क्षेत्र के साथ उनके जुड़ाव और इको-टूरिज्म की संभावनाओं को गहराई से समझा। भ्रमण के अंतिम चरण में, प्रशिक्षित बाघ मित्रों की टोली ने लग्गा भग्गा, सेल्हा तथा प्रसिद्ध शारदा सागर जलाशय का दौरा किया। इस भौगोलिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य भारत-नेपाल सीमा और पीटीआर के इस बेहद संवेदनशील कॉरिडोर की भौगोलिक स्थिति, वन्यजीवों के आवागमन के रास्तों और सुरक्षा चुनौतियों का वास्तविक ज्ञान प्राप्त करना था। विश्व प्रकृति निधि के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार के अनुसार इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण के बाद अब ये बाघ मित्र अपने-अपने वन प्रभागों में जाकर मानव और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होंगे।

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