दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस के सात मामलों में सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। लंबे समय तक चली सुनवाई और समझौते की कई कोशिशों के असफल रहने के बाद जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने अपना फैसला सुनाया। इससे पहले 2 अप्रैल को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने बकाया राशि के भुगतान को लेकर राजपाल यादव के बदलते रुख पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि अभिनेता की ओर से दिए गए आश्वासन और बाद में रखे गए तर्कों में स्पष्ट विरोधाभास है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि उन्हें अपेक्षित जवाब नहीं मिल रहे हैं और अंडरटेकिंग में कही गई बातों तथा बाद की दलीलों में अंतर दिखाई देता है।
अदालत ने सातों मामलों में तीन-तीन महीने के साधारण कारावास की सजा बरकरार रखी है। हालांकि, सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, इसलिए अभिनेता को कुल तीन महीने की ही सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा प्रत्येक मामले में 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस तरह कुल जुर्माना 7.35 करोड़ रुपये बनता है। अदालत के आदेश के अनुसार प्रत्येक मामले में 1 करोड़ 4 लाख 75 हजार रुपये शिकायतकर्ता को और 25 हजार रुपये राज्य को अदा किए जाएंगे।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई के दौरान अभिनेता के रवैए को संदिग्ध बताते हुए कहा कि उन्हें बकाया राशि चुकाने के कई अवसर दिए गए, लेकिन वे अपने वादों को पूरा करने में विफल रहे।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की भी कोशिश की। अदालत के सुझाव पर शिकायतकर्ता फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के रूप में 6 करोड़ रुपये लेने को तैयार हो गया था। हालांकि, वर्चुअल सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। उन्होंने अदालत को बताया कि उन्हें पहले ही भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, अपनी संपत्ति बेचनी पड़ी और वे काफी भुगतान पहले ही कर चुके हैं।
हाई कोर्ट ने एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर 3 करोड़ रुपये के संरचित भुगतान (Structured Payment) का सुझाव भी दिया था और स्पष्ट किया था कि यह केवल न्यायिक सुझाव है, कोई अंतिम समझौता नहीं। इसके बावजूद दोनों पक्ष किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके, जिसके बाद अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया।