रायपुर। छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू और महाभारत की वीर गाथाओं को पूरी दुनिया में गूंजने वाली प्रख्यात पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का आज तड़के सुबह निधन हो गया। उन्होंने 70 वर्ष की आयु में रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से उम्र संबंधी गंभीर बीमारियों और पैरालिसिस (लकवा) से जूझ रही थीं। उनके निधन की खबर से देश-विदेश के कला, संस्कृति और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

  • समय और स्थान: रविवार तड़के सुबह लगभग 3:15 बजे, रायपुर एम्स में निधन।
  • कलात्मक पहचान: महाभारत की कथाओं को सुनाने वाली छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक कला ‘पंडवानी’ की वैश्विक ब्रांड एंबेसडर
  • क्रांतिकारी कदम: पुरुषों के वर्चस्व वाली ‘कापालिक शैली’ में पंडवानी गाकर रूढ़ियों को तोड़ा।
  • शीर्ष सम्मान: भारत सरकार द्वारा पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित।

तंबूरा छोड़ने की ज़िद से पेरिस के मंचों तक का सफर

दुर्ग जिले के एक छोटे से गांव गनियारी में जन्मी तीजन बाई का जीवन संघर्षों से भरा रहा। छत्तीसगढ़ के पारधी समाज में जन्मी तीजन बाई को बचपन में महिलाओं द्वारा पंडवानी गाने पर समाज के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा, यहाँ तक कि उन्हें घर से भी निकाल दिया गया था।

लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने हाथ के तंबूरे को ही उन्होंने अपना हथियार और भगवान कृष्ण का गांडीव धनुष बनाया। तीजन बाई ने उस दौर में पंडवानी की ‘कापालिक शैली’ (खड़े होकर, अभिनय और नृत्य के साथ गाना) को अपनाया, जिसे सिर्फ पुरुष गाते थे। उनकी कड़कती आवाज, चेहरे के अद्भुत भाव और मंच पर उनकी ऊर्जा को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने प्रस्तुति दी, जिसके बाद वे अंतरराष्ट्रीय मंचों (जैसे पेरिस, लंदन, रूस) पर भारत का चेहरा बनीं।

अंतिम विदाई और राजकीय शोक की लहर

तीजन बाई के निधन पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, राज्यपाल सहित देश के कई बड़े राजनेताओं और कलाकारों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। कला समीक्षकों का कहना है कि तीजन बाई का जाना केवल एक कलाकार का जाना नहीं, बल्कि लोक संस्कृति के एक युग का अंत है। उनका पार्थिव शरीर उनके गृह ग्राम गनियारी ले जाया जा रहा है, जहाँ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Site designed and maintained by Lalit Rastogi