​पीलीभीत। गत वर्ष आई अत्यधिक विनाशकारी बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए बीसलपुर के रमपुरा चौसर हरदोपट्टी मार्ग पर अब जल्द ही आवागमन पूरी तरह सुचारू होने जा रहा है। बाढ़ के दौरान सड़क कट जाने से इस क्षेत्र का संपर्क टूट गया था, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। आपदा के समय ही पीलीभीत के सांसद और भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्रीजितिन प्रसाद ने प्रभावित क्षेत्र का हवाई व जमीनी दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को मार्ग को जल्द से जल्द दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए थे।
​केंद्रीय मंत्री के इन निर्देशों के बाद PWD के अभियंताओं ने तुरंत एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था। श्री जितिन प्रसाद ने व्यक्तिगत रुचि लेते हुए शासन स्तर पर इस प्रस्ताव की मजबूत पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप रमपुरा देवहा नदी के पुल से लेकर चौसर हरदो पट्टी तक—जहां-जहां बाढ़ के पानी का अत्यधिक निकास और दबाव था—वहां आठ बड़ी पुलियों के निर्माण की वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति मिल सकी। स्वीकृति मिलने के साथ ही केंद्रीय मंत्री ने बरसात और आगामी बाढ़ सीजन से पहले कार्य को अभिलंब पूरा करने की समय सीमा तय की थी।
​आगामी बाढ़ के खतरे को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा इस मार्ग पर पुलियों के निर्माण कार्य को बेहद तेजी से पूरा करा लिया गया है। क्षेत्रीय जनता की लंबे समय से चली आ रही परेशानी को देखते हुए किसान नेता देव स्वरूप पटेल ने स्वयं मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता से मौके पर ही वार्ता की और कहा कि आगामी वर्षा ऋतु से पहले जो भी छिटपुट या अपूर्ण कार्य रह गए हैं, उन्हें तत्काल पूरा किया जाए ताकि बीसलपुर-रमपुरा चौसर हरदोपट्टी मार्ग पर भारी व हल्के वाहनों का आवागमन फिर से सुचारू हो सके।
​किसान नेता देव स्वरूप पटेल से वार्ता के दौरान लोक निर्माण विभाग अधिकारियों ने प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि सभी आठों पुलियों का मुख्य ढांचा तैयार किया जा चुका है और वर्तमान में उनके सुरक्षात्मक कार्य (जैसे एप्रोच रोड व गाइड वॉल) तेजी से किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि सुरक्षात्मक कार्य पूरे होते ही बहुत जल्द इस महत्वपूर्ण ग्रामीण मार्ग पर जनता के लिए आवागमन पूरी तरह से प्रारंभ कर दिया जाएगा, जिससे दर्जनों गांवों को बाढ़ के समय भी संपर्क मार्ग की बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

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