पीलीभीत। जिले के अमरिया क्षेत्र में प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट को लेकर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का आक्रोश लगातार गहराता जा रहा है। ग्राम पंचायत विरहनी के माजरा कटिया पंडरी में इस प्लांट की स्थापना के खिलाफ ग्रामीणों ने लामबंदी शुरू कर दी है, जिससे प्रशासन और कंपनी अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस भारी-भरकम उद्योग के आने से उनके जीवन, आजीविका और पर्यावरण पर ऐसा विपरीत असर पड़ेगा, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकेगी। जनसुनवाई के दौरान भी यह गतिरोध खुलकर सामने आया, जहां भारी विरोध के चलते माहौल गरमाया रहा।

ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता क्षेत्र की उपजाऊ कृषि भूमि को लेकर है। उनका मानना है कि इथेनॉल प्लांट से निकलने वाले केमिकल और अपशिष्ट के कारण आस-पास की बेहद उर्वरा भूमि धीरे-धीरे बंजर हो जाएगी। इसके अलावा, प्लांट के संचालन के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होगी, जिससे क्षेत्र के भूगर्भ जल स्तर में भारी गिरावट आने की आशंका है। ग्रामीणों को डर है कि आने वाले समय में पूरा इलाका गंभीर जल संकट की चपेट में आ जाएगा और खेती तो दूर, पीने के पानी के लिए भी त्राहि-त्राहि मच जाएगी।

इस पूरे आंदोलन को जिले के प्रगतिशील और जैविक खेती के लिए राज्य स्तर पर पुरस्कृत हो चुके किसान मनजीत सिंह का भी मजबूत साथ मिला है। मनजीत सिंह ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार जैविक (ऑर्गेनिक) खेती को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे विनाशकारी प्लांट लगाकर खुद अपने ही दावों की हवा निकाल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्लांट के लगने से न केवल विरहनी और कटिया पंडरी, बल्कि बेला पोखरा, कुलहरा, हरदासपुर, उड़रा, भदसरा और भूड़ा केमोर सहित दर्जनों गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और हजारों किसान अपनी जमीन से वंचित होकर भुखमरी की कगार पर आ जाएंगे।

हाल ही में आयोजित हुई जनसुनवाई में इस विरोध की गूंज साफ तौर पर सुनाई दी। हालांकि, जिलाधिकारी और इथेनॉल कंपनी के उच्च अधिकारियों ने ग्रामीणों के इस डर को दूर करने और उन्हें समझाने-बुझाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। किसान नेता मनजीत सिंह का कहना है कि उन्होंने जनसुनवाई में लिखित रूप से अपना कड़ा विरोध दर्ज करा दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय स्तर पर उनकी बात नहीं मानी गई और प्लांट के निर्माण को नहीं रोका गया, तो वे इस लड़ाई को उच्च स्तर पर ले जाएंगे और जरूरत पड़ने पर माननीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।