पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, पीलीभीत में चिकित्सा शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, कौशल-आधारित और रोगी-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा के कुशल निर्देशन में आज पैथोलॉजी विभाग द्वारा विद्यार्थियों एवं प्रशिक्षणार्थियों के लिए केंद्रीय प्रयोगशाला (सेंट्रल लैब) तथा रक्त केंद्र (ब्लड बैंक) का एक विशेष शैक्षणिक प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भविष्य के चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों में प्रयोगात्मक व वैज्ञानिक समझ को विकसित करना था।
कार्यक्रम के पहले चरण में विद्यार्थियों को केंद्रीय प्रयोगशाला का भ्रमण कराया गया। यहाँ उन्हें हीमेटोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, क्लिनिकल पैथोलॉजी तथा इम्यूनोलॉजिकल जांचों की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से समझाया गया। विशेषज्ञों ने आधुनिक उपकरणों के उपयोग और जांचों की सटीकता बनाए रखने वाली गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली (क्वालिटी कंट्रोल) की जानकारी दी। छात्र-छात्राओं को मरीजों के नमूना संग्रहण (सैंपल कलेक्शन) से लेकर अंतिम रिपोर्ट तैयार होने तक की पूरी प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया, जिससे वे प्रयोगशाला निदान की व्यावहारिक बारीकियों को समझ सकें।
इसके बाद, विद्यार्थियों को रक्त केंद्र (ब्लड बैंक) के प्रदर्शन से जोड़ा गया, जहाँ उन्हें सुरक्षित रक्तदान, रक्त संग्रहण, भंडारण और संक्रमणजनित रोगों की प्रभावी जांच प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को ‘रक्त अवयव पृथक्करण’ (ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन) तकनीक के बारे में विशेष रूप से बताया गया। उन्हें समझाया गया कि आधुनिक रक्त केंद्र केवल खून जमा करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पैक्ड रेड सेल्स, प्लेटलेट्स और फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा जैसे अवयवों को अलग-अलग करके एक ही यूनिट रक्त से कई गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
इस शैक्षणिक आयोजन से जहाँ विद्यार्थियों में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ी, वहीं उन्हें रक्त सुरक्षा मानकों और आपातकालीन स्थितियों में इसकी उपलब्धता के महत्व को समझने का अवसर भी मिला। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने गहरी रुचि दिखाते हुए विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। पैथोलॉजी विभाग के संकाय सदस्यों एवं तकनीकी कर्मचारियों के विशेष सहयोग से आयोजित यह प्रदर्शन भावी चिकित्सकों में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के व्यावहारिक ज्ञान को सुदृढ़ करने में बेहद मददगार साबित हुआ