लखनऊ | उत्तर प्रदेश की राजनीति और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के खेमे से एक बहुत बड़ी सांगठनिक खबर सामने आ रही है। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने राज्य में पार्टी संगठन को नए सिरे से धार देने के लिए एक बड़ा और कड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। पार्टी की उच्च स्तरीय राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में उत्तर प्रदेश की मौजूदा पूरी प्रदेश कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। हालांकि, वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय को इस क्लीन स्वीप से राहत मिली है और वे अपने पद पर बने रहेंगे।

केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी की अध्यक्षता में लिया गया कड़ा फैसला

यह महत्वपूर्ण निर्णय राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया जयंत चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित की गई राष्ट्रीय कार्यसमिति की मैराथन बैठक के बाद लिया गया है। बैठक में उत्तर प्रदेश के सांगठनिक ढांचे, हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और आगामी रणनीतियों पर गहन मंथन किया गया। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा देने और सांगठनिक पदानुक्रम को और अधिक चुस्त-दुरुस्त करने के लिए पुराने ढांचे में आमूल-चूल बदलाव करना बेहद जरूरी हो गया था।

सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष बचे, बाकी पूरा संगठन साफ

रालोद के आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश प्रदेश कार्यकारिणी के सभी उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव, प्रवक्ता और अन्य क्षेत्रीय व जिला स्तरीय कमेटियों के प्रभार समाप्त हो गए हैं। केवल प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ही अपने पद पर जिम्मेदारी निभाते रहेंगे और उनकी देखरेख में ही नए संगठन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

जल्द होगा नए और युवा संगठन का गठन

पार्टी के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल को और अधिक प्रभावी, सक्रिय और मजबूत बनाने के लिए बहुत जल्द ही एक नई, ऊर्जावान और संतुलित प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। नई टीम में जमीन से जुड़े सक्रिय कार्यकर्ताओं और युवाओं को बड़ी जिम्मेदारियां मिलने की प्रबल संभावना है। जयंत चौधरी के इस ताबड़तोड़ फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के रालोद कार्यकर्ताओं और नेताओं में अपनी नई भूमिकाओं को लेकर हलचल तेज हो गई है।


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