कानपुर (उत्तर प्रदेश): कानपुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है, जहां विभाग के अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से एक मृत व्यक्ति के नाम पर दर्ज कार को उसकी मौत के तीन साल बाद किसी दूसरे के नाम ट्रांसफर कर दिया गया। विभागीय नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला यह मामला तब खुला जब पीड़ित पत्नी ने इसकी लिखित शिकायत आला अधिकारियों से की। इस शिकायत के बाद आरटीओ प्रशासन में हड़कंप मच गया है और बिना मूल मालिक की भौतिक मौजूदगी के फाइल पास करने को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार के मूल मालिक की मृत्यु साल 2022 में ही हो चुकी थी। इसके बावजूद, शातिर जालसाजों ने आरटीओ के कर्मचारियों के साथ साठगांठ कर अक्टूबर 2025 में मृत व्यक्ति के फर्जी दस्तखत (हस्ताक्षर) तैयार किए और कार का ट्रांसफर दूसरे के नाम करा दिया। नियमतः किसी भी वाहन के ट्रांसफर के लिए मूल मालिक का आरटीओ कार्यालय में मौजूद होना और बायोमेट्रिक या उचित सत्यापन होना अनिवार्य है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर फाइल को पास किया गया। फिलहाल इस बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है और दोषी अधिकारियों व दलालों पर कानूनी गाज गिरना तय माना जा रहा है।