विधि संवाददाता, पीलीभीत। जनपद सत्र न्यायालय ने 13 साल पुराने एक सनसनीखेज मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जहां घर में घुसकर जानलेवा हमला करने के आरोपी को दोषी करार दिया गया है। जनपद सत्र न्यायाधीश रविन्द्र कुमार ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए मुख्य आरोपी पप्पू उर्फ हरीबाबू को 7 वर्ष के कठोर कारावास और 1 लाख रुपये के भारी-भरकम जुर्माने की सजा से दंडित किया है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि जुर्माने की राशि जमा होने पर उसकी आधी धनराशि पीड़ित (घायल) को मुआवजे के रूप में दी जाएगी। वहीं, इस मामले के एक अन्य आरोपी अरविंद के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के कारण उसे अदालत ने दोषमुक्त (बरी) कर दिया है।
यह पूरा मामला पुलिस की लचर कार्यप्रणाली और पीड़ित के लंबे कानूनी संघर्ष की कहानी भी बयां करता है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 15 फरवरी 2013 को थाना पूरनपुर क्षेत्र के ग्राम सबलपुर निवासी वादी किशोर कुमार शर्मा उर्फ बबलू ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि जब वह अपने परिवार के साथ घर में सो रहा था, तभी उसके सगे चाचा पप्पू उर्फ हरीबाबू, अरविंद और दो अन्य अज्ञात लोग घर में घुस आए। गाली-गलौज करते हुए पप्पू उर्फ हरीबाबू ने तमंचे से फायर कर दिया, जिससे गोली वादी के भाई के हाथ में जा लगी। जब वादी बीच-बचाव करने आया, तो आरोपियों ने बांके (धारदार हथियार) से उस पर भी जानलेवा हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था।
हैरानी की बात यह रही कि पुलिस ने इस गंभीर मामले में जांच के बाद अप्रैल 2013 में अंतिम रिपोर्ट (फाइनल रिपोर्ट) दाखिल कर मामले को झूठा करार दे दिया था। लेकिन पीड़ित ने हार नहीं मानी और पुलिस की फाइनल रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति दाखिल करते हुए इसे गलत तथ्यों पर आधारित बताया। इसके बाद अवर न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली का बारीकी से अवलोकन करने के बाद पप्पू उर्फ हरीबाबू और अरविंद को अभियुक्त पाते हुए समन जारी कर तलब किया। मामला सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होने के कारण इसे जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत में कमिट (भेज) कर दिया गया।
न्यायालय में चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (DGC) महेंद्र पाल गंगवार ने मुस्तैदी से पैरवी की। उन्होंने वादी मुकदमा और मुख्य रूप से घायल सरवन सहित कई अहम गवाहों को अदालत के समक्ष पेश कर गुनाह साबित किया। हालांकि आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया था, लेकिन अदालत ने पत्रावली पर मौजूद पुख्ता सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर मुख्य आरोपी पप्पू उर्फ हरीबाबू को दोषी पाते हुए जेल भेज दिया, जबकि सह-आरोपी अरविंद को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।