पीलीभीत। जनपद में समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के विरुद्ध प्रशासन द्वारा की जा रही कथित दमनात्मक और अलोकतांत्रिक कार्यवाहियों को लेकर राजनीति गरमा गई है। गुरुवार को समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह ‘जग्गा’ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी पीलीभीत को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से सपा ने जनपद में विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज हो रहे मुकदमों पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है और इसे लोकतंत्र की मूल भावना पर सीधा आघात बताया है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह ‘जग्गा’ ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन सत्ता के दबाव में विपक्ष की आवाज को कुचलने का प्रयास कर रहा है। विशेष रूप से जिला उपाध्यक्ष श्री मखदूम खां को निराधार धाराओं में जेल भेजना राजनीतिक दुर्भावना का स्पष्ट प्रमाण है। जग्गा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि लोकतंत्र में असहमति को अपराध मानना संवैधानिक सिद्धांतों के विरुद्ध है; यदि निर्दोष कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो समाजवादी पार्टी पूरे जनपद में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगी।

वहीं, पूर्व मंत्री अनीस अहमद खां “फूल बाबू” ने भी इस प्रकरण की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि निर्दोष कार्यकर्ताओं को झूठे मुकदमों में फंसाना राजनीतिक प्रतिशोध की पराकाष्ठा है। उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जो भी अधिकारी सत्ता के एजेंट के रूप में कार्य कर दोषी पाए जाएं, उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह अपने कार्यकर्ताओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर वैधानिक रास्ता अपनाने को तैयार है।
इस अवसर पर सपा जिला महासचिव नफीस अहमद अंसारी, पूर्व जिलाध्यक्ष सुधीर तिवारी एडवोकेट, यूसुफ कादरी, जिला उपाध्यक्ष बालकराम सागर, काशीराम सरोज, और पीलीभीत विधानसभा अध्यक्ष इम्तियाज अल्वी सहित भारी संख्या में पदाधिकारी मौजूद रहे। अन्य उपस्थित प्रमुख चेहरों में प्रदीप सोनकर, गयासुद्दीन मंसूरी, यूथ ब्रिगेड जिलाध्यक्ष शाहिद खान (संजय खान), अधिवक्ता सभा जिलाध्यक्ष ज्योति प्रकाश शुक्ला, धनपति वर्मा, सपा युवजन सभा जिलाध्यक्ष हरगोविंद गंगवार और नाबिर अली मंसूरी शामिल थे। साथ ही सतेंद्र मौर्य, हाजी शीबू मलिक, अरशद ताहिर, मेंहदी रजा, शराफत यार खां, मलखान सिंह वर्मा, केके पाल और कई अन्य कार्यकर्ताओं ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया।