क्या सिडकुल की बड़ी कंपनियां उत्तराखंड सरकार के नियमों को ठेंगा दिखाकर श्रमिकों के हक पर डाका डाल रही हैं? रुद्रपुर के सिडकुल स्थित माइक्रोमैक्स कंपनी में आज मंगलवार को एक ऐसा ही बड़ा विवाद सामने आया है। कंपनी प्रबंधन द्वारा किए जा रहे कथित उत्पीड़न और शोषण के खिलाफ सैकड़ों श्रमिकों ने कांग्रेस नेता हरीश पनेरू के नेतृत्व में प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आक्रोशित श्रमिकों ने कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन करते हुए उपजिलाधिकारी (SDM) मनीष बिष्ट से मुलाकात की और उन्हें जिलाधिकारी को संबोधित एक तीखा ज्ञापन सौंपा।
12 साल की नौकरी और मात्र 10 हजार वेतन ।
श्रमिकों के हक की आवाज उठाते हुए कांग्रेस नेता हरीश पनेरू ने बताया कि माइक्रोमैक्स कंपनी प्रदेश सरकार के न्यूनतम वेतन देने के शासनादेश की लगातार धज्जियां उड़ा रही है। कंपनी में जो इंजीनियर पिछले 10 से 12 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें आज भी मात्र 10 हजार रुपये के करीब मासिक वेतन दिया जा रहा है। जब भी कर्मचारी अपने हक के लिए आवाज उठाते हैं, तो प्रबंधन उन्हें हाई कोर्ट जाने की धमकी देकर डराता और धमकाता है।
कंपनी ने किया ले-ऑफ, श्रम विभाग मौन ।
श्रमिकों का आरोप है कि कंपनी ने अब तानाशाही रवैया अपनाते हुए ‘ले-ऑफ’ घोषित कर दिया है और कर्मचारियों का कंपनी में प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया है। इससे सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट आ खड़ा हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने श्रम विभाग पर भी मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग से शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। श्रमिकों ने मांग की है कि शासनादेश की अवमानना करने पर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ले-ऑफ बंद कर न्याय नहीं मिला, तो वे आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।