शामली। उत्तर प्रदेश के शामली जनपद से सरकारी दस्तावेजों में तकनीकी और मानवीय त्रुटि के चलते एक नागरिक के मौलिक अधिकारों और उसकी सामाजिक पहचान को प्रभावित करने वाला एक अत्यंत संवेदनशील मामला प्रकाश में आया है। यहाँ विगत आठ वर्षों से एक महिला सरकारी रिकॉर्ड और आधार कार्ड में खुद को ‘महिला’ साबित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष न्याय की गुहार लगा रही है। कंप्यूटर ऑपरेटर की एक गंभीर लापरवाही के कारण आधार कार्ड में महिला का जेंडर (लिंग) ‘पुरुष’ दर्ज कर दिया गया था। अब इस विसंगति को दूर करने और महिला की वास्तविक पहचान स्थापित करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने उसका मेडिकल परीक्षण कराने का आधिकारिक आदेश जारी किया है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, शामली की निवासी फातिमा ने वर्ष 2018 के आस-पास अपना आधार कार्ड बनवाया था। कार्ड जारी होने के बाद जब उसने देखा तो आधार पंजीकरण केंद्र के ऑपरेटर की त्रुटि के कारण उसके लिंग वाले कॉलम में ‘महिला’ के स्थान पर ‘पुरुष’ अंकित हो चुका था। इस लिपिकीय त्रुटि के कारण फातिमा को गंभीर वित्तीय और सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ा। जेंडर मिसमैच होने के कारण उसका बैंक खाता, राशन कार्ड और किसी भी प्रकार की सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलना पूरी तरह बंद हो गया। फातिमा ने आधार सुधार केंद्रों और स्थानीय स्तर पर कई बार संशोधन के प्रयास किए, परंतु कड़े यूआईडीएआई (UIDAI) नियमों और जेंडर अपडेट की सीमित संख्या के तकनीकी कारणों से उसका आधार कार्ड सही नहीं हो सका।
लगातार आठ वर्षों तक न्याय के लिए भटकने के बाद जब मामला जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया, तो स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी शामली ने एक अभूतपूर्व प्रशासनिक कदम उठाया है। सीएमओ कार्यालय द्वारा जारी आदेश के तहत फातिमा की शारीरिक व जैविक पहचान की आधिकारिक पुष्टि के लिए उसका विधिवत चिकित्सकीय परीक्षण (मेडिकल एग्जामिनेशन) कराया जाएगा। इसके लिए जिला अस्पताल के डॉक्टरों के एक विशेष पैनल का गठन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट आने के बाद, उसे जिला मजिस्ट्रेट और यूआईडीएआई के क्षेत्रीय कार्यालय को एक साक्ष्य (सर्टिफिकेट) के रूप में भेजा जाएगा, ताकि फातिमा के आधार कार्ड में जेंडर को ‘पुरुष’ से संशोधित कर पुनः ‘महिला’ किया जा सके और उसे हो रही मानसिक व प्रशासनिक प्रताड़ना से मुक्ति मिल सके।