पीलीभीत। नाथ संप्रदाय के ध्वजवाहक परम पूज्य महंत योगी हनुमान नाथ जी महाराज (न्यूरानपुर मढ़ी, बीसलपुर) के पावन सानिध्य में एक स्थानीय होटल में महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए महाराज श्री ने कहा कि भारत के धर्मपरायण सनातनी सज्जनों से हमारी विशेष आशाएं हैं। वर्तमान समय में साधु समाज के वेश और परिवेश में अनेकों ऐसे लोग आ गए हैं, जो असामाजिक और अधार्मिक भावनाओं से ग्रसित हैं। ऐसे लोगों के कृत्यों के कारण समाज के सम्मान को गहरी ठेस पहुँच रही है और यह स्थिति आजकल स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हो रही है।
उन्होंने आगे कहा कि इसी प्रकार के कृत्य शंकराचार्य परंपरा के संन्यासी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी विगत एक-डेढ़ वर्षों से लगातार कर रहे हैं। अत्यंत प्राचीन परंपराओं में प्रमुखता से गिने जाने वाले गौरक्ष नाथ संप्रदाय के सर्वोच्च पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जी महाराज के प्रति व्यक्तिगत द्वेष भावना से प्रेरित होकर वे लगातार अनुचित शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। उनके इन बयानों से पीठ की गरिमा, पवित्र परंपरा और उस परंपरा को मानने वाले करोड़ों सनातनियों के हृदय को आघात पहुँच रहा है। सनातन सभ्यता में अनेकों आध्यात्मिक परंपराएं होने के बावजूद भी आपस में हमेशा परस्पर प्रेम की भावना रही है। हमारी परंपरा में कभी भी किसी आचार्य द्वारा दूसरे आचार्य के प्रति असम्मानजनक व्यवहार करने की रीति नहीं रही है। परंतु, जहाँ एक ओर गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूरे विश्व में सनातन धर्म की ध्वजा का परचम लहरा रहा है, वहीं अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उस गरिमा को ठेस पहुँचाने की नीयत से निरंतर कार्य कर रहे हैं।
महंत योगी हनुमान नाथ जी महाराज ने कड़े शब्दों में कहा कि नाथ संप्रदाय का प्रतिनिधि होने के नाते उनकी इन विध्वंसकारी हरकतों को चुनौती देना मेरी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “मुझे जानकारी मिली है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आगामी 1 जुलाई 2026 को ‘गौ-रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा’ लेकर पीलीभीत की धरती पर प्रवेश कर रहे हैं, जो कि हमारी तपस्थली और साधना स्थली है। यह यात्रा पूरी तरह से विभाजनकारी है और किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पुष्ट करने की दृष्टि से निकाली जा रही है।”
महाराज श्री ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को गौ संरक्षण विषय पर डेटा और तथ्यों के आधार पर शास्त्र चर्चा (शास्त्रार्थ) की खुली चुनौती दी। उनका मानना है कि गौरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में सरकार द्वारा विगत 9 वर्षों में गौ संरक्षण के लिए जो ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं, उन्हें नीचा दिखाने के उद्देश्य से ही यह यात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि वे तथ्यों के आधार पर इस बात पर व्यापक चर्चा के लिए तैयार हैं कि विगत 9 सालों में सरकार ने क्या काम किए और उससे पहले गौवंश की स्थिति क्या थी। या तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस शास्त्र चर्चा की चुनौती को स्वीकार करें, अन्यथा अपनी हार मानकर पीलीभीत जनपद में प्रवेश किए बिना ही वापस लौट जाएं।
प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने पीलीभीत जनपद में इस यात्रा के आयोजकों को भी कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यह यात्रा पूरी तरह से धर्म द्रोही और धर्म विरोधी है, इसलिए इसका खंडन किया जाना चाहिए। इसके बावजूद यदि आयोजकों को लगता है कि यह यात्रा आवश्यक है, तो उनका भी प्रेस वार्ता में स्वागत है। वे आएं और तथ्यों के साथ सिद्ध करके दिखाएं कि यह यात्रा क्यों आवश्यक है। महाराज श्री ने जनता से भी अपील की कि लोग कपटी और साधु वेशधारी कालनेमि जैसे लोगों से सावधान रहें, अपने जीवन को साधनामय बनाएं ताकि सही और गलत को समझने का विवेक जागृत हो सके।