देहरादून/शिमला। प्रकृति जब अपने सबसे सुंदर रूप में होती है, तो वह किसी कविता जैसी लगने लगती है। पहाड़ों पर साल के पहले बर्फबारी के मंजर को देखकर कुछ ऐसा ही अहसास हो रहा है। ऐसा प्रतीत होता है मानो ऊंचे शिखर और सफेद बर्फ, एक साल के लंबे फासले को भुलाकर आज पूरी तरह एक-दूसरे में समा जाना चाहते हैं।

एक साल का इंतजार और यह आलिंगन
हिमालय की चोटियों पर जब सफेद मखमल सी बर्फ गिरती है, तो वह केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि पहाड़ों का श्रृंगार बन जाती है। बीते कई महीनों की चिलचिलाती धूप और धूल को पीछे छोड़कर, पहाड़ अब बर्फ की शीतल चादर ओढ़कर शांत और सुकून में हैं। यह मिलन इतना गहरा है कि जमीन और आसमान का अंतर मिट गया है।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए उत्सव
पहाड़ और बर्फ के इस संगम ने न केवल प्रकृति को नया जीवन दिया है, बल्कि स्थानीय लोगों के चेहरों पर भी मुस्कान बिखेर दी है। पर्यटकों के लिए यह किसी जादुई दुनिया (Fairyland) से कम नहीं है। चारों ओर फैली सफेदी और पेड़ों पर लदी बर्फ की फुहारें इस बात की गवाह हैं कि प्रकृति का प्रेम कितना शाश्वत और गहरा है।

शांति और सुकून का मंजर
भीड़भाड़ और शोर-शराबे से दूर, बर्फबारी के बाद पहाड़ों में एक अजीब सी खामोशी छा गई है। यह खामोशी उस मिलन की है, जिसमें शब्द कम और अहसास ज्यादा हैं। ऐसा लगता है मानो कुदरत खुद इस पल को थाम लेना चाहती है।

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