रुद्रपुर। उत्तराखंड के जनपद ऊधम सिंह नगर की रुद्रपुर स्थित एसीजेएम अदालत ने वैवाहिक धोखाधड़ी और छद्म रूप धारण कर महिलाओं का शोषण करने वाले अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय पंचम अपर सिविल जज (सीडी)/एसीजेएम शमा परवीन ने पहली पत्नी के जीवित रहते हुए और यह अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक तथ्य छिपाकर दूसरा विवाह रचाने के मामले में आरोपी राजीव शर्मा को दोषी पाया है। अदालत ने अभियुक्त को भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) की धारा 495 के तहत दोषसिद्ध पाते हुए 3 वर्ष के साधारण कारावास तथा आर्थिक दण्ड (अर्थदण्ड) की सजा से दण्डित किया है। अर्थदण्ड न देने पर आरोपी को अतिरिक्त विधिक कारावास भुगतना होगा।
मैरिज वेबसाइट के जरिए फर्जी फौजी बनकर जाल में फंसाया, अमृतसर यूनिट से खुला राज
प्राप्त विवरण के अनुसार, अभियोजन पक्ष ने कहानी को स्पष्ट करते हुए बताया कि वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश के जनपद बरेली अंतर्गत जौहरपुर निवासी राजीव शर्मा ने एक मैरिज वेबसाइट के माध्यम से रुद्रपुर निवासी शालू पाण्डेय से सम्पर्क स्थापित किया था। बातचीत के दौरान राजीव ने स्वयं को भारतीय सेना में कार्यरत एक संभ्रांत अधिकारी बताया और शालू को विश्वास दिलाया कि उसका अपने पैतृक परिवार से अब कोई विधिक या सामाजिक सम्बन्ध नहीं है। इन कूट रचित तथ्यों और झूठे दावों पर विश्वास करते हुए 14 मई 2015 को रुद्रपुर स्थित होटल कंचनतारा में दोनों का हिन्दू रीति-रिवाज से भव्य विवाह संपन्न हुआ। विवाह के कुछ समय बाद आरोपी के आचरण और व्यवहार पर गंभीर सन्देह होने पर शालू के मायके पक्ष के लोगों ने अमृतसर स्थित उसकी सैन्य यूनिट में विधिक रूप से जानकारी जुटाई। वहां विभागीय जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि राजीव पहले से ही विवाहित है और उसकी पहली पत्नी अंशिका शर्मा से उसके तीन बच्चे भी हैं।
महिला हेल्पलाइन के समझौते के बाद भी प्रताड़ना, कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई थी एफआईआर
इस खौफनाक सच्चाई के सामने आने के बाद पीड़िता शालू पाण्डेय ने तत्काल महिला हेल्पलाइन में विधिक शिकायत दर्ज कराई थी। हेल्पलाइन के माध्यम से हुए एक लिखित समझौते के बाद वह दोबारा अपनी ससुराल गई, परंतु वहाँ भी उसके साथ शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा। स्थानीय पुलिस द्वारा मामले में हीलाहवाली करने और मुकदमा दर्ज नहीं किए जाने पर पीड़िता ने न्यायालय की शरण ली। इसके पश्चात, माननीय कोर्ट के कड़े आदेश पर कोतवाली रुद्रपुर पुलिस ने विभिन्न विधिक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना की और ठोस साक्ष्यों के साथ आरोप पत्र (चार्जशीट) न्यायालय में दाखिल किया।
न्यायालय में चली लम्बी सुनवाई, गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के गहन परीक्षण के बाद अदालत ने माना कि आरोपी ने अपनी पहली पत्नी के जीवित रहते हुए जानबूझकर दूसरा विवाह किया, जो कि विधिक रूप से अक्षम्य अपराध है। हालांकि, पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण कोर्ट ने सह-आरोपी मुन्नी देवी और प्रेमनारायण शर्मा को विधिक रूप से दोषमुक्त कर दिया, वहीं मारपीट और अन्य आरोपों में भी राजीव को आंशिक राहत मिली। परंतु दूसरी शादी की जानकारी क्रूरतापूर्वक छिपाने के मुख्य विधिक अपराध में दोषी ठहराते हुए न्यायालय ने उसे 3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाकर जेल भेज दिया है।