रुद्रपुर। प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शनों की तस्करी के मामले में विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) दीपाली शर्मा की कोर्ट ने महिला तस्कर को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है जुर्माना अदा नहीं करने पर दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नशे का कारोबार समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा है ऐसे अपराधों में नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दीपक कुमार अरोरा के अनुसार फरवरी 2020 में रम्पुरा चैकी पुलिस को सूचना मिली थी कि खेड़ा क्षेत्र स्थित चांद मस्जिद के पास एक महिला प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन बेच रही है।

सूचना पर पुलिस टीम ने महिला कांस्टेबल को साथ लेकर मौके पर छापेमारी की पुलिस को देखते ही महिला भागने लगी लेकिन उसे घेराबंदी कर पकड़ लिया गया पूछताछ में उसने अपना नाम शहनाज अंसारी निवासी खेड़ा रुद्रपुर बताया तलाशी के दौरान उसके कब्जे से ब्यूप्रेनॉर्फिन के 108 इंजेक्शन, डायजापाम के 108 इंजेक्शन तथा एविल की 115 शीशियां बरामद हुईं जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की।करीब 6 वर्ष तक चले विचारण के बाद विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) दीपाली शर्मा की अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों को पर्याप्त मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दीपक कुमार अरोरा ने पैरवी की। सजा के बिंदु पर बचाव पक्ष ने आरोपी के महिला होने और छोटे बच्चे का हवाला देते हुए राहत की मांग की लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि बरामद नशीले इंजेक्शनों की मात्रा वाणिज्यिक मात्रा से कई गुना अधिक थी नशे का अवैध कारोबार युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहा है इसलिए ऐसे मामलों में कठोर दण्ड देना आवश्यक है।

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