लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक बड़ा फरमान जारी किया है। अब पुलिसकर्मियों सहित सभी श्रेणी के राज्य कर्मचारियों को अपनी चल-अचल संपत्ति (Movable and Immovable Property) का पूरा विवरण मानव संपदा पोर्टल (Manav Sampada Portal) पर ऑनलाइन सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा।
अल्टीमेटम: 31 जनवरी तक का समय
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन कर्मचारियों ने 31 जनवरी 2026 तक अपनी संपत्तियों का ब्योरा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया, उन्हें भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस समयसीमा का उल्लंघन करने वालों का जनवरी महीने का वेतन रोक दिया जाएगा।
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प्रमोशन पर भी लगेगी रोक
सिर्फ वेतन ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के करियर ग्राफ पर भी इसका असर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश शासन के आदेश के अनुसार, विवरण न देने वाले कार्मिकों को पदोन्नति (Promotion) के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। 1 फरवरी के बाद होने वाली किसी भी विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक में ऐसे डिफॉल्टर कर्मचारियों के नाम पर विचार नहीं किया जाएगा।
पारदर्शिता की ओर बड़ा कदम
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यूपी पुलिस विभाग में अब तक लगभग 58% कर्मियों ने अपना डाटा फीड कर दिया है, लेकिन बड़ी संख्या में अभी भी कर्मचारी बाकी हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाना और अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने वालों पर शिकंजा कसना है।
कर्मचारी क्या करें?
सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने अधीन कार्यरत कर्मियों से जल्द से जल्द मानव संपदा पोर्टल पर लॉगिन कर ‘Property Return’ विकल्प के तहत अपनी संपत्तियों की जानकारी भरवाएं।
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