पीलीभीत। भारत विकास परिषद (भाविप) शाखा ‘टाइगर’ (रोहिलखंड प्रांत, पूर्वी एनसीआर-1) के तत्वाधान में चिरौंजी लाल वीरेंद्र पाल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान उपस्थित पदाधिकारियों और प्रबुद्ध जनों ने गौ सेवा, स्वच्छता एवं प्रदूषण नियंत्रण जैसे गंभीर सामाजिक और पर्यावरणीय विषयों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान सहजन (ड्रमस्टिक) के औषधीय गुणों और महत्ता के बारे में जानकारी देते हुए विद्यालय परिसर में इसके पाँच वृक्षों का रोपण भी किया गया।
चर्चा में भाग लेते हुए शाखा अध्यक्ष लक्ष्मीकांत शर्मा, सचिव मनोज मित्तल, संपर्क संयोजक अशोक कुमार शर्मा, ‘भारत को जानो’ कार्यक्रम संयोजक अरविंद गुप्ता, गुरु तेग बहादुर जयंती संयोजक डॉ. विजय कुमार सिंह तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य सुभाष कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि गाय की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का मूल मंत्र गौ सेवा है, क्योंकि हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। मान्यता है कि गाय के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास होता है, और उनकी निष्काम सेवा से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है बल्कि जीवन में समृद्धि का आगमन होता है। स्वच्छता पर बात करते हुए वक्ताओं ने अफसोस जताया कि लोग सफाई तो चाहते हैं, लेकिन खुद आगे नहीं आना चाहते। उन्होंने “स्वच्छता ही सेवा – गंदगी जानलेवा” का नारा देते हुए कहा कि स्वच्छता हमें निरोग रखने में सबसे बड़ी सहायक है।
कार्यक्रम में प्रदूषण से बचाव और पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘आर-सिद्धांत’ समझाए गए, जिसमें रिड्यूस (कम करना), रीयूज (पुनः उपयोग), रीसाइकिल (पुनर्चक्रण), रीजेनरेट, रिफिल और रिपेयर के बारे में बताया गया। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि इन सबसे महत्वपूर्ण एक और ‘आर’ है, वह है रेस्पॉन्सिबल (जिम्मेदार)। जब तक हम स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति खुद को जिम्मेदार नहीं मानेंगे और अपने आचरण से उदाहरण पेश नहीं करेंगे, तब तक समाज प्रेरित नहीं होगा। इस अवसर पर रोपे गए सहजन के पाँच पौधों के संरक्षण की कमान छात्रों को सौंपी गई। ‘पाँच छात्र-एक वृक्ष’ के संकल्प के साथ भारत विकास परिषद समय-समय पर इन पौधों की प्रगति की निगरानी करेगी, क्योंकि वृक्षारोपण से ज्यादा उनका संरक्षण महत्वपूर्ण है। इस सफल आयोजन से परिषद के सामाजिक व पर्यावरणीय प्रयासों को नई गति मिली है।