​पीलीभीत। वामपंथी दलों के देशव्यापी आह्वान पर आज पीलीभीत में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी भाकपा माले के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था, परीक्षाओं में हो रहे पेपर लीक और प्रदेश में चल रहे बुलडोजर अभियान को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित एक 9 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपकर विभिन्न गंभीर मुद्दों पर तत्काल दंडात्मक और सुधारात्मक कार्रवाई करने की मांग की।


​प्रदर्शन की अगुवाई कर रही भाकपा माले की केंद्रीय कमेटी सदस्य कामरेड कृष्णा अधिकारी ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मेरठ के ललिता गौतम हत्या व बलात्कार कांड का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि योगी सरकार के अफसर ‘मनुवादी मानसिकता’ से ग्रसित हैं। कामरेड कृष्णा ने कहा कि इस बर्बर घटना के बाद पुलिस अपराधियों को पकड़ने में नाकाम रही, और जब पीड़ित परिवार व ग्रामीण न्याय की गुहार लगाने पुलिस दफ्तर पहुंचे, तो मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय के निर्देश पर प्रदर्शनकारियों की बेरहमी से पिटाई की गई और उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया गया। भाकपा माले ने इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए मेरठ एसएसपी को तत्काल पद से हटाकर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने तथा घटना के सभी असली दोषियों को फौरन गिरफ्तार करने की मांग उठाई है।


​शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कामरेड कृष्णा अधिकारी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नीट समेत तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक के कारण देश के 20 से अधिक छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। इसके बावजूद मोदी सरकार असंवेदनशील बनी हुई है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोनम वांग्चुग और आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई छात्र पिछले 16 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जंतर-मंतर पर किसी भी अनशनकारी छात्र के स्वास्थ्य को कोई नुकसान पहुंचता है, तो देश की जनता शिक्षा मंत्री के साथ-साथ प्रधानमंत्री को भी पद से बेदखल कर देगी।


​इसके साथ ही, प्रदर्शन में शामिल पार्टी के जिला प्रभारी अफरोज आलम ने उत्तर प्रदेश में जारी बुलडोजर अभियान को पूरी तरह असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने स्थानीय मुद्दों को उठाते हुए कहा कि पीलीभीत में ‘टाइगर प्रोजेक्ट’ के कारण जंगल किनारे रहने वाले सैकड़ों ग्रामीणों का जीवन पहले ही संकट में है और अब हाथी उनकी फसलों को रौंद रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरनपुर में बनाई जा रही ‘लेपर्ड सफारी’ भी स्थानीय निवासियों को बर्बाद करने की एक और कोशिश है। अफरोज आलम ने स्पष्ट किया कि वनीकरण या किसी भी अन्य सरकारी योजना के नाम पर पीलीभीत के किसी भी गरीब या जंगल किनारे के बाशिंदे को उजाड़ने का भाकपा माले पूरी ताकत से विरोध करेगी। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से राज्य कमेटी सदस्य कामरेड सईद खां, पूरनपुर ब्लॉक सचिव देवीदयाल, मरौरी ब्लॉक सचिव एडवोकेट शम्स विकास, किसान महासभा के जिला संयोजक धर्मेंद्र पाण्डेय, मनोहरलाल वर्मा, सुभाष, सहदेव, रामचंद्र, दयाराम, सर्वेश कश्यप और गोपाल मिश्र सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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