बरेली/भोजीपुरा। उत्तर प्रदेश की बरेली पुलिस (@bareillypolice) ने नकली इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स बनाने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने भोजीपुरा थाना क्षेत्र के दोहरिया पचदौर गांव में चल रही एक अवैध फैक्ट्री पर छापेमारी करते हुए मौके से दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस फैक्ट्री से नामी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के नकली चार्जर, मोबाइल पार्ट्स और डेटा केबल का भारी जखीरा बरामद हुआ है।

खुफिया इनपुट पर भोजीपुरा पुलिस की बड़ी रेड

पुलिस को सूचना मिली थी कि भोजीपुरा के दोहरिया पचदौर इलाके में चोरी-छिपे नकली इलेक्ट्रॉनिक सामान की मैन्युफैक्चरिंग और रीपैकेजिंग का काम चल रहा है। इस इनपुट पर पुलिस टीम ने पूरी तैयारी के साथ फैक्ट्री पर छापा मारा। पुलिस ने मौके से फरमान और उवैश नाम के दो मुख्य आरोपियों को रंगे हाथ दबोच लिया। तलाशी के दौरान दोनों के पास से कई व्यक्तिगत मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं, जिनका इस्तेमाल वे इस अवैध कारोबार की सप्लाई चेन को मैनेज करने के लिए कर रहे थे।

सैमसंग, MI, ओप्पो और वीवो के नकली प्रोडक्ट्स का जखीरा जब्त

यह शातिर गैंग बाजार में बिकने वाले नामी ब्रांड्स जैसे Samsung, Mi, Oppo और Vivo के हूबहू दिखने वाले नकली सामान तैयार कर रहा था। पुलिस ने मौके से जो सामान बरामद किया है, उसकी सूची इस प्रकार है:

  • कीपैड व पुराने फोन: 52 चालू हालत के कीपैड फोन और सैमसंग के 44 पुराने मोबाइल फोन।
  • फोन की बॉडी व पार्ट्स: 165 खाली फोन बॉडी (चैसिस), जिनका इस्तेमाल फोन असेंबल करने के लिए होना था।
  • चार्जर और अडैप्टर: अर्धनिर्मित (आधी बनी हुई) हालत में 365 ‘सुपर डाट’ चार्जिंग अडैप्टर।
  • डेटा केबल व टैबलेट: 700 सी-टाइप (C-Type) और वी-टाइप (V-Type) डेटा केबल के साथ 18 टैबलेट डिवाइस।
  • फर्जी पैकेजिंग मटेरियल: नामी कंपनियों के नाम वाले 200 नकली यूएसबी (USB) केबल रैपर और डिब्बे।

ग्राहकों की जान से खिलवाड़ और पुलिस की कार्रवाई

शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गैंग घटिया और सस्ते इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को लाकर उन्हें ब्रांडेड कंपनियों के फर्जी रैपरों में पैक करता था। इसके बाद इन्हें असली बताकर स्थानीय बाजारों और रिटेल काउंटरों पर महंगे दामों में सप्लाई किया जाता था। बिना किसी क्वालिटी और सुरक्षा मानक (Certified Quality Standards) के बने ये नकली चार्जर और केबल उपभोक्ताओं के लिए बेहद खतरनाक हैं, जिनसे मोबाइल ब्लास्ट और शॉर्ट-सर्किट की घटनाएं होती हैं।

बरेली पुलिस ने दोनों अभियुक्तों के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट, ट्रेडमार्क एक्ट और धोखाधड़ी की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात का पता लगा रही है कि इस फर्जी फैक्ट्री के लिए कच्चा माल कहां से आता था और बरेली व आसपास के जिलों में कौन से दुकानदार इनके इस अवैध कारोबार में शामिल थे।

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