पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) एवं संबद्ध चिकित्सालय में प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा के निर्देशानुसार “नशा मुक्ति एवं नशे की रोकथाम” विषय पर एक दिवसीय जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। कम्यूनिटी मेडिसिन और मानसिक रोग विभाग द्वारा एमबीबीएस बैच-2024 के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भावी चिकित्सकों को नशे के दुष्प्रभावों, रोकथाम और पुनर्वास की अवधारणा से अवगत कराना था, ताकि वे समाज में इसके खिलाफ अलख जगा सकें।
कार्यक्रम में विशेष केस स्टडी के रूप में आमंत्रित, बरेली में नशा मुक्ति केंद्र के संचालक श्री राजा कपूर ने अपने जीवन के कड़वे अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि नशा केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक जीवन को भी तबाह कर देता है। उन्होंने युवाओं में बढ़ती लत का बड़ा कारण “नशे की दुकान” (नशीले पदार्थों की सहज उपलब्धता) और “आध्यात्मिक शून्यता” को बताया। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति जीवन के वास्तविक उद्देश्य और नैतिक मूल्यों से दूर होता है, तब वह व्यसन की ओर भागता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आत्मअनुशासन और सकारात्मक सोच अपनाने का आह्वान किया।
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। मनोचिकित्सा विभाग की सहायक आचार्य डॉ. प्रियंका भटनागर ने परीक्षा के दिनों में तनाव प्रबंधन के गुर सिखाए। उन्होंने मानसिक दबाव से बचने के लिए नियमित टहलने, संगीत सुनने और पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सत्य पाल सिंह ने नशे को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बताते हुए कहा कि डॉक्टरों का दायित्व केवल इलाज करना नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित करना भी है। सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अरुण सिंह ने चिकित्सा छात्रों से समुदाय में ‘स्वास्थ्य शिक्षक’ की भूमिका निभाते हुए व्यवहार परिवर्तन संचार के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
अंत में, महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने अपने संदेश में कहा कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल कानूनों से नहीं, बल्कि शिक्षा, जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता से ही संभव है। चिकित्सा विद्यार्थी समाज के स्वास्थ्य दूत हैं, जिन्हें भविष्य में भी ऐसे जन-जागरूकता अभियानों के जरिए लोगों को सामाजिक बुराइयों से बचाना होगा। कार्यक्रम के दौरान एमबीबीएस छात्रों ने विशेषज्ञों से नशा मुक्ति और पुनर्वास से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका विस्तार से समाधान किया गया।