पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय और इसके संबद्ध चिकित्सालय ने गंभीर मरीजों की चिकित्सा और निदान सेवाओं में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। अस्पताल के गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती एक गंभीर मरीज के बेडसाइड (बिस्तर) पर ही पहली बार सफलतापूर्वक ‘अल्ट्रासाउंड-गाइडेड फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी’ प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। इस अत्याधुनिक और न्यूनतम आक्रामक (मिनिमल इनवेसिव) तकनीक के सफल प्रयोग से अब जिले के गंभीर मरीजों को सुरक्षित, त्वरित और सटीक जांच की सुविधा मिल सकेगी।
यह जटिल प्रक्रिया आईसीयू में भर्ती एक 68 वर्षीय महिला मरीज पर की गई, जिनकी थायरॉयड ग्रंथि में 67 × 54 मिमी आकार की एक बड़ी गांठ थी। महिला की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें आईसीयू से रेडियोलॉजी विभाग तक ले जाना काफी जोखिम भरा था। ऐसे में डॉक्टरों की टीम ने मरीज की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए आईसीयू के भीतर ही अल्ट्रासाउंड की मदद से एफएनएसी जांच करने का साहसिक निर्णय लिया।
इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रक्रिया को आईसीयू प्रभारी डॉ. अरविंद एम द्वारा सफलतापूर्वक संचालित किया गया। उन्होंने रियल-टाइम अल्ट्रासाउंड इमेजिंग तकनीक का उपयोग करते हुए सुई को बेहद सुरक्षित तरीके से गांठ तक पहुंचाया और जांच के लिए जरूरी कोशिकीय नमूना (सेंपल) लिया। इसके तुरंत बाद, पैथोलॉजी विभाग के डॉ. प्रदीप शेखावत ने इन नमूनों की त्वरित जांच कर बिना किसी देरी के सटीक डायग्नोस्टिक रिपोर्ट उपलब्ध कराई, जिससे मरीज का समय पर इलाज संभव हो सका।
चिकित्सकों के अनुसार, अल्ट्रासाउंड-गाइडेड एफएनएसी तकनीक के माध्यम से डॉक्टर रक्त वाहिकाओं और आसपास के संवेदनशील अंगों को स्क्रीन पर लाइव देखते हुए सुई डालते हैं। इससे अनजाने में होने वाली किसी भी आंतरिक चोट या जटिलता की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाती है और जांच की शुद्धता कई गुना बढ़ जाती है।
चिकित्सा महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आईसीयू में बेडसाइड अल्ट्रासाउंड-गाइडेड एफएनएसी की शुरुआत संस्थान की उन्नत और तकनीक-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वहीं, मीडिया प्रभारी डॉ. अरुण सिंह ने इसे संस्थान के लिए एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने डॉ. अरविंद एम की प्रक्रियात्मक दक्षता और डॉ. प्रदीप शेखावत की विशेषज्ञता की सराहना करते हुए कहा कि दोनों विभागों के इस उत्कृष्ट तालमेल से संस्थान में उन्नत चिकित्सकीय प्रशिक्षण और अनुसंधान के नए रास्ते खुलेंगे।