पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (एएसएमसी) एवं संबद्ध चिकित्सालय, पीलीभीत के गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) के चिकित्सकों ने अपनी उत्कृष्ट चिकित्सकीय दक्षता से एक बेहद गंभीर 29 वर्षीय युवक को नया जीवन दिया है। ट्यूबरकुलर मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क क्षय रोग) और बहुऔषधि-प्रतिरोधी (एमडीआर) फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित इस युवक को बरेली के एक निजी अस्पताल से बेहद नाजुक हालत में यहाँ स्थानांतरित किया गया था। पीलीभीत आईसीयू पहुँचने पर डॉक्टरों ने पाया कि मरीज की श्वास नली (एंडोट्रेकियल ट्यूब) अपनी जगह से हट चुकी थी और वह गंभीर श्वसन संकट में था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आईसीयू प्रभारी डॉ. अरविंद एम. ने तुरंत री-इंट्यूबेशन कर मरीज का श्वास मार्ग सुरक्षित किया और वेंटिलेटर सहायता से उसकी स्थिति को स्थिर किया। जाँच में मस्तिष्क क्षय रोग की पुष्टि होने पर तत्काल विशेष एंटी-ट्यूबरकुलर उपचार (एटीटी) शुरू किया गया।
मरीज के लंबे समय से वेंटिलेटर पर होने के कारण अगले ही दिन डॉ. अरविंद एम. ने बेडसाइड पर ही परक्यूटेनियस डाइलेशनल ट्रेकियोस्टॉमी (पीडीटी) जैसी उन्नत प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिससे मरीज को ऑपरेशन थिएटर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ी। ट्रेकियोस्टॉमी के महज पांच दिनों के भीतर मरीज की श्वसन क्षमता में सुधार हुआ और उसे वेंटिलेटर से मुक्त कर दिया गया। हालांकि, उपचार के दौरान मरीज बहुऔषधि-प्रतिरोधी जीवाणुओं के कारण वेंटिलेटर-संबंधित निमोनिया (वीएपी) की चपेट में आ गया, लेकिन आईसीयू टीम ने उच्च स्तरीय लक्षित एंटीबायोटिक थेरेपी और कड़े संक्रमण नियंत्रण उपायों से इस पर भी विजय प्राप्त की। संक्रमण ठीक होने के बाद ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब हटा दी गई और लंबे समय तक आईसीयू में रहने के कारण आई मांसपेशियों की कमजोरी को दूर करने के लिए मरीज को विशेष फिजियोथेरेपी, संतुलित पोषण और व्यापक पुनर्वास कार्यक्रम प्रदान किया गया।

इस जटिल और लंबी चिकित्सा यात्रा के बाद डिस्चार्ज के समय मरीज पूरी तरह सचेत, मानसिक रूप से स्वस्थ और अपने परिवार से बात करने में सक्षम था। वह अस्पताल से अपने पैरों पर चलकर घर विदा हुआ। इस बड़ी कामयाबी पर कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा और उप प्राचार्य डॉ. अरुण सिंह ने डॉ. अरविंद एम., नर्सिंग स्टाफ, फिजियोथेरेपी टीम, माइक्रोबायोलॉजी व पैथोलॉजी विभाग सहित पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि इतने चुनौतीपूर्ण मामले का सफल प्रबंधन यह साबित करता है कि एएसएमसी पीलीभीत क्षेत्र की जनता को उच्च स्तरीय तृतीयक चिकित्सा सेवाएं देने में पूरी तरह सक्षम है और अब स्थानीय मरीजों को जटिल उपचार के लिए बड़े महानगरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है।