पीलीभीत। न्यूरिया थाना क्षेत्र के ग्राम मरौरी के ग्रामीणों और वन विभाग के बीच उपजा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। वन कर्मियों की कार्यशैली, कथित उत्पीड़न और मारपीट के विरोध में सोमवार को सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों के उग्र रुख को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर महिला थाना, कोतवाली, सुनगढ़ी और न्यूरिया थाने से भारी पुलिस बल तैनात कर दिया, जिससे कलेक्ट्रेट परिसर छावनी में तब्दील हो गया।
विवाद की जड़ 3 मार्च की एक घटना बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, उस दिन गांव के कुछ बच्चे होलिका दहन के लिए जंगल से करीब एक किलोमीटर दूर तालाब के किनारे से सूखी लकड़ियां एकत्र कर रहे थे। आरोप है कि रात करीब पौने नौ बजे वन दरोगा सुमित कुमार और फॉरेस्ट गार्ड सचिन ने अपने साथियों के साथ बच्चों को पकड़ लिया। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर जब ग्रामीण और महिलाएं मौके पर पहुंचे, तो वन विभाग की टीम ने उनके साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वन कर्मियों ने महिलाओं के साथ हाथापाई की और एक ग्रामीण का मोबाइल व नकदी भी छीन ली।

घटना के बाद से ही ग्रामीणों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी रोष है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस ने मेडिकल परीक्षण तो कराया, लेकिन अब तक आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। इससे पूर्व ग्रामीणों ने बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद का घेराव कर विरोध जताया था और जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपकर धरने का अल्टीमेटम भी दिया था।
धरना स्थल पर पहुंची उपजिलाधिकारी सदर श्रद्धा सिंह ने ग्रामीणों से वार्ता की और उनका मांग पत्र लिया। एसडीएम ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान क्षेत्राधिकारी नगर दीपक चतुर्वेदी भी पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। ग्रामीणों ने दो टूक कहा है कि जब तक दोषी वन कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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