पीलीभीत। पीलीभीत जनपद में गोवंश और वन्यजीवों को घातक चोटों से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने जनपद के सभी उप जिलाधिकारियों और तहसीलदारों को निर्देश जारी करते हुए खेतों की मेड़ पर लगाए जाने वाले ब्लेड वाले और कटीले तारों (ब्लेडेड वायर) को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है। शासन के पुराने निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम (संशोधित 2020) के तहत पशुओं या वन्यजीवों को अंग-भंग करना या उनके जीवन को संकट में डालना एक गंभीर दंडनीय अपराध है।
जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, किसान अपनी फसल की सुरक्षा के लिए घातक तारों के स्थान पर अब केवल साधारण तार या रस्सी का ही प्रयोग कर सकेंगे। अक्सर यह देखा गया है कि ब्लेड वाले तारों की चपेट में आकर आवारा गोवंश और जंगल से सटे इलाकों में वन्यजीव गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। प्रशासन ने राजस्व विभाग के कर्मियों को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्रों में सघन निगरानी रखें। यदि किसी भी कृषक के खेत में प्रतिबंधित कटीले या ब्लेड वाले तार पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में कठोर विधिक कार्यवाही की जाएगी।
इस अभियान में वन विभाग को भी सक्रिय भूमिका सौंपी गई है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी और जिला कृषि अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे वन सीमा से सटे गांवों में विशेष ध्यान दें। यदि वन क्षेत्रों के किनारे ब्लेड वाले तार मिलते हैं, तो तत्काल इसकी सूचना संबंधित एसडीएम या तहसीलदार को दी जाए ताकि दोषियों के खिलाफ त्वरित एक्शन लिया जा सके। प्रशासन के इस निर्णय का उद्देश्य कृषि रक्षा के साथ-साथ बेजुबान पशुओं और दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाना है।
पीलीभीत में फसलों की सुरक्षा के लिए कटीले और ब्लेड वाले तारों पर पूर्ण प्रतिबंध: उल्लंघन पर होगी जेल