​पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) और उसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों में पिछले चार-पांच महीनों से प्रवासी हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। नेपाल से आए जंगली हाथियों का झुंड इस क्षेत्र में लगातार डेरा डाले हुए है और वापस लौटने को तैयार नहीं है। इन हाथियों ने वन विभाग द्वारा ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए लगाई गई चैन लिंक फेंसिंग को कई स्थानों पर पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। फेंसिंग टूटने से अब वन्यजीवों और ग्रामीणों के बीच टकराव का खतरा बेहद बढ़ गया है। हाथियों का यह दल न सिर्फ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि माला और महोफ रेंज के अंतर्गत आने वाले कई गांवों में घुसकर तबाही मचा रहा है।
​हाथियों के इस उत्पात से सबसे ज्यादा प्रभावित जंगल किनारे बसे गांवों के किसान हुए हैं। हाथियों का झुंड रात के समय खेतों में घुसकर ग्रामीणों की मेहनत से उगाई गई गन्ने और धान की खड़ी फसलों को पैरों तले रौंदकर पूरी तरह उजाड़ रहा है। विशेष रूप से माला रेंज के रिछोला, गोयल कॉलोनी, सिरसा, सरदा पुरवा, बसंता पुर और मारोरी जैसे गांवों में स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। रिछोला गांव में हाथियों ने फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। फसलों की बर्बादी के साथ-साथ अब ग्रामीणों के जान-माल पर भी चौबीसों घंटे खतरा मंडरा रहा है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
​ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी आवाज उठानी शुरू कर दी है। यूनाइटेड अकाली दल और ऑल इंडिया मतुआ महासंघ ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। यूनाइटेड अकाली दल (उत्तर प्रदेश) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह कहलों तथा ऑल इंडिया मतुआ महासंघ (उत्तर प्रदेश) के अध्यक्ष जय किशन मण्डल ने संयुक्त रूप से भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद को एक पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने मंत्री जी को क्षेत्र के बिगड़ते हालातों से अवगत कराया है और प्रभावित गांवों के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है।
​केंद्रीय राज्य मंत्री को भेजे गए पत्र में दोनों संगठनों ने स्पष्ट किया है कि नेपाल से आए इन जंगली हाथियों ने सीमावर्ती इलाकों में भारी उत्पात मचा रखा है। उन्होंने वन विभाग की ढीली कार्यप्रणाली पर चिंता जताते हुए केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें। संगठनों ने मांग की है कि वन विभाग को तत्काल कड़े और प्रभावी आदेश दिए जाएं ताकि इन जंगली हाथियों को खदेड़कर वापस नेपाल की सीमा के भीतर भेजा जा सके। ग्रामीणों ने भी सरकार से गुहार लगाई है कि फेंसिंग की मरम्मत कराई जाए और हाथियों के आतंक से उन्हें जल्द से जल्द निजात दिलाई जाए।

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