पीलीभीत। लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत के निर्देशों के अनुपालन में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत गोमती नदी और उसकी सहायक नदियों—कठना, भैंसी, सरायन एवं बेहता—के संरक्षण और वैज्ञानिक शोध की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस योजना के तहत बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दत्ता के नेतृत्व में विशेषज्ञों और शोधार्थियों की एक टीम मंगलवार को गोमती नदी के उद्गम स्थल, माधौटांडा पहुंची। टीम का स्वागत गोमती ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं उप जिलाधिकारी कलीनगर, प्रवेश कुमार ने किया। इस दौरान ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य राममूर्ति सिंह और निर्भय सिंह ने टीम को नदी पुनरुद्धार हेतु अब तक किए गए प्रयासों और गोमती की वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की।


​उद्गम स्थल पर निरीक्षण के दौरान जिला गंगा समिति के परियोजना अधिकारी सौरभ सिंह, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता और जल जीवन मिशन के अधिकारियों सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे। पर्यावरण विभाग के प्रमुख प्रोफेसर दत्ता ने बताया कि इस सर्वेक्षण और शोध का मुख्य उद्देश्य गोमती व उसकी सहायक नदियों की मैपिंग करना और वैज्ञानिक डेटा एकत्र करना है, ताकि पारिस्थितिक तंत्र को समझते हुए नदी को पुनर्जीवित करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जा सके। यह भ्रमण कार्यक्रम 10 मार्च से शुरू होकर 12 मार्च 2026 तक निर्धारित है। आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि इस वैज्ञानिक शोध के माध्यम से नदियों की वर्तमान स्थिति का सटीक आकलन किया जाएगा, जिससे उनके अस्तित्व को बचाने के लिए भविष्य में प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

​निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, शोध दल 11 मार्च को शाहजहाँपुर और लखीमपुर खीरी में सहायक नदियों की स्थिति का जायजा लेगा, जबकि 12 मार्च को सीतापुर जिले में शोध और मैपिंग का कार्य संपन्न किया जाएगा। लखनऊ मंडल आयुक्त ने सभी संबंधित जनपदों के स्थानीय प्रशासन और जल जीवन मिशन के अधिकारियों को इस सर्वेक्षण के दौरान विश्वविद्यालय की टीम को पूर्ण सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल को गोमती नदी के प्राचीन गौरव को वापस लाने और क्षेत्रीय जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और प्रभावी प्रयास माना जा रहा है।

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