सितारगंज (ऊधम सिंह नगर): इथेनॉल उद्योगों की बढ़ती मांग और किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से सोमवार को ग्राम घुसरी में ‘मक्का क्षेत्र दिवस’ का भव्य आयोजन किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के विशेषज्ञों के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने शिरकत की।

औद्योगिक फसल बना मक्का:
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनुसंधान सहायक डॉ. रामनिवास ने कहा कि मक्का अब केवल पेट भरने वाली फसल नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा जरूरतों (इथेनॉल) को पूरा करने वाली एक महत्वपूर्ण औद्योगिक फसल बन चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत में 10-12 मिलियन टन मक्का का उपयोग इथेनॉल बनाने में हो रहा है, जिसे भविष्य में और विस्तार दिया जाएगा।

आधुनिक तकनीक और प्रबंधन:
वैज्ञानिक डॉ. मनीष ककरालिया ने किसानों को खाद, सिंचाई और कटाई के बाद के प्रबंधन (Post-harvest management) की बारीकियां समझाईं। उन्होंने मक्के की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उसे ढेर में लगाने के बजाय नेचुरल या आर्टिफिशियल ड्रायर (सुखाने की मशीन) के उपयोग पर विशेष जोर दिया।

वैश्विक संकट और भारत की स्थिति:
परियोजना प्रबंधक डॉ. एस.एल. जाट ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति के कारण मक्के की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। वर्ष 2025-26 तक देश का मक्का उत्पादन 50 मिलियन टन के पार पहुँचने का अनुमान है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ईरान-इज़राइल युद्ध के चलते वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने से भारतीय मक्के की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ रही है।

किसानों का उत्साह:
यंग प्रोफेशनल बजरंग जाखड़ द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में किसानों ने पारंपरिक फसलों के स्थान पर मक्का की खेती और आधुनिक टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का संकल्प लिया।

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