लखनऊ/गोरखपुर (11 जुलाई 2026)। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा पर्यावरण संतुलन, वैश्विक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और हरित आवरण को बढ़ाने के उद्देश्य से रविवार को पूरे प्रदेश में एक विशाल हरित क्रांति की शुरुआत की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह… माफ़ी, मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रविवार, 12 जुलाई 2026 को संपूर्ण उत्तर प्रदेश में ‘महावृक्षारोपण 2026’ अभियान का भव्य शुभारंभ किया जाएगा। इस वर्ष राज्य सरकार ने प्रदेश की पावन धरा पर रिकॉर्ड 35 करोड़ पौधे रोपित करने का विधिक व ऐतिहासिक महा-लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री इस महाभियान का आधिकारिक शंखनाद अपने गृह जनपद गोरखपुर से एक भव्य समारोह के दौरान करेंगे।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत स्थापित होंगी विकास वाटिकाएं
प्राप्त प्रामाणिक और आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह संपूर्ण महाभियान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए वैश्विक जन-आंदोलन ‘एक पेड़ मां के नाम’ के विधिक संकल्पों के तहत संचालित किया जा रहा है। इस अभियान को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के प्रत्येक ग्राम पंचायत, नगरीय निकाय, शिक्षण संस्थानों और विकास खंडों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान के अंतर्गत औषधीय और धार्मिक महत्व वाले पौधों के संरक्षण के लिए ‘पवित्र त्रिवेणी रोपण’ (बरगद, पीपल और नीम) किया जाएगा, साथ ही प्रत्येक विकास खंड में पर्यावरण को आर्थिक उन्नति से जोड़ने के लिए ‘विकास वाटिका’ की स्थापना की जाएगी। शासन द्वारा इस महाभियान के जरिए जन-जन को ‘आओ मिलकर पेड़ लगाएं’ का लोक-कल्याणकारी संदेश दिया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती, प्रशासन की तैयारियां पूर्ण
राजधानी लखनऊ स्थित वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के उच्चाधिकारियों ने बताया कि 35 करोड़ पौधों के रोपण और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग, राजस्व विभाग, पंचायती राज और शिक्षा विभाग के समन्वय से एक मजबूत डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम तैयार किया गया है। प्रत्येक रोपित किए जाने वाले पौधे की जियो-टैगिंग (Geo-Tagging) की जाएगी ताकि उनकी उत्तरजीविता को सुनिश्चित किया जा सके। सरकार के इस दूरदर्शी कदम से उत्तर प्रदेश के वनाच्छादित क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि होगी और पर्यावरण संरक्षण के विधिक प्रयासों को एक नई व वैश्विक मजबूती प्राप्त होगी। जिला प्रशासनों द्वारा सभी सरकारी नर्सरियों से किसानों, जन प्रतिनिधियों और आम नागरिकों को निःशुल्क पौधों के वितरण की विधिक व्यवस्था पूर्ण कर ली गई है।