दियोरिया कला PILIBHIT। हरियाणा के सोनीपत में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने उत्तर प्रदेश के बीसलपुर क्षेत्र स्थित बढ़ेपुरा ता कुसुमा गांव की खुशियां छीन ली हैं। बुधवार शाम बाजरा काटने के लिए ईको कार में सवार होकर हरियाणा के झज्जर जा रहे 11 मजदूरों की गाड़ी एक अज्ञात वाहन से टकरा गई। इस भीषण दुर्घटना में चालक सहित पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सात मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को रोहतक पीजीआई में भर्ती कराया गया है। हादसे की खबर मिलते ही समूचे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और एक ही गली के चार घरों में मातम छा गया।

प्रशासनिक तत्परता और ढांढस
घटना की जानकारी मिलते ही किसान नेता देवस्वरूप पटेल ने केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद को पूरे मामले से अवगत कराया। केंद्रीय मंत्री ने रोहतक पीजीआई के डायरेक्टर से दूरभाष पर वार्ता कर घायलों के समुचित उपचार और हर संभव सहायता के निर्देश दिए। वहीं, स्थिति का जायजा लेने जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव और उपजिलाधिकारी नागेंद्र पांडेय गांव पहुंचे। अधिकारियों ने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और पूरी मदद का आश्वासन दिया।

एक ही गली में चार चिराग बुझे
दुर्घटना का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि चार मृतकों के मकान एक ही गली में महज सौ-सौ मीटर के दायरे में स्थित हैं। इस त्रासदी ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।
रामनरेश: सात भाइयों में सबसे बड़े रामनरेश अविवाहित थे और परिवार के मुख्य सहारा थे। उनकी तीन बहनों की शादी हो चुकी है। उनकी असमय मौत से वृद्ध मां चमेली देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।
मेवाराम: मेवाराम भी अविवाहित थे और अपने भाई नेतराम के साथ रहकर मजदूरी करते थे। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अक्सर हरियाणा जाते थे, लेकिन इस बार उनका यह सफर अंतिम साबित हुआ।
अग्रपाल वर्मा: 28 वर्षीय अग्रपाल की शादी छह साल पहले कमलेश से हुई थी। वे अपने पीछे चार साल की बेटी वर्तिका और तीन साल के बेटे गोलू को छोड़ गए हैं। पति की मौत की खबर सुनते ही पत्नी कमलेश बार-बार बेहोश हो रही हैं, वहीं पूरे परिवार के सामने मासूम बच्चों के लालन-पालन का संकट खड़ा हो गया है।

अंतिम संस्कार को लेकर बनी सहमति
शवों के अंतिम संस्कार के लिए गांव में पर्याप्त जगह न होने के कारण जिलाधिकारी ने दो किलोमीटर दूर रामनगर जगतपुर में अंत्येष्टि का सुझाव दिया था। हालांकि, परिजनों और ग्रामीणों के आग्रह पर अंत्येष्टि गांव में ही कराने का निर्णय लिया गया। उपजिलाधिकारी बीसलपुर के निर्देश पर अंत्येष्टि स्थल जाने वाले मार्ग की मरम्मत कराई गई और परिसर की साफ-सफाई समय रहते पूरी की गई।

अश्रुपूरित आंखों से अंतिम विदाई
शुक्रवार शाम लगभग 5:15 बजे जब चार मृतकों के शव एंबुलेंस से गांव बढ़ेपुरा पहुंचे, तो चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। बीसलपुर विधायक विवेक वर्मा, बरखेड़ा के पूर्व विधायक किशनलाल राजपूत, किसान नेता देवस्वरूप पटेल और उपजिलाधिकारी नागेंद्र पांडेय की मौजूदगी में भारी पुलिस सुरक्षा के बीच चारों का गांव में अंतिम संस्कार किया गया। वहीं, पांचवें मृतक ईको चालक आरिफ का शव उसके पैतृक गांव सुजनी ले जाया गया, जहां गमगीन माहौल में उसे सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
