सितारगंज। उत्तराखंड के राजकीय स्नातकोत्तर (पीजी) महाविद्यालय सितारगंज में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 की तैयारियों के तहत एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की गई है। कॉलेज में कला संकाय के अंतर्गत संचालित होने वाले छह प्रमुख पीजी (एमए) विषयों—हिंदी, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, इतिहास, समाजशास्त्र और शिक्षा शास्त्र के अस्थायी संबद्धता विस्तार (Affiliation Extension) को लेकर कुमाऊं विश्वविद्यालय के विशेष निरीक्षक मंडल ने महाविद्यालय परिसर का व्यापक निरीक्षण किया। बृहस्पतिवार को कॉलेज पहुंचे विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञों और अधिकारियों के दल ने उच्च शिक्षा के मानकों की जमीनी हकीकत जानने के लिए विभिन्न विभागों का दौरा किया। इस दौरान टीम ने छात्र-छात्राओं की कक्षाओं, मुख्य पुस्तकालय (लाइब्रेरी) में पुस्तकों की उपलब्धता और कॉलेज के सभी आवश्यक अभिलेखों व दस्तावेजों की बारीकी से जांच-पड़ताल की।

निरीक्षण कार्यक्रम की समाप्ति के बाद राजकीय पीजी महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रेनू रानी बंसल ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय के निरीक्षण मंडल द्वारा की गई यह जांच पूरी तरह से सकारात्मक रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉलेज के पास मौजूद सभी बुनियादी सुविधाएं, शैक्षणिक बुनियादी ढांचा और आवश्यक दस्तावेज कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित कड़े मानकों के सर्वथा अनुरूप पाए गए हैं। जांच दल द्वारा तैयार की गई विस्तृत और अंतिम निरीक्षण रिपोर्ट को अब कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल के मुख्य कार्यालय को प्रेषित किया जा रहा है। इसी आधिकारिक रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन सितारगंज कॉलेज के इन छह महत्वपूर्ण विषयों की अस्थायी संबद्धता को आगे बढ़ाने पर अपना अंतिम और वैधानिक निर्णय लेगा।

इस महत्वपूर्ण निरीक्षण कार्य को सुचारू रूप से संपन्न कराने में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों, विभागीय प्रभारियों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। पूरी प्रक्रिया के दौरान कॉलेज स्टाफ ने निरीक्षण दल को सभी आवश्यक फाइलें, इंफ्रास्ट्रक्चर के आंकड़े और सहयोग प्रदान किया ताकि संबद्धता विस्तार की रिपोर्ट बिना किसी तकनीकी अड़चन के समय पर भेजी जा सके। कॉलेज प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि रिपोर्ट मानकों पर खरी उतरने के कारण विश्वविद्यालय से जल्द ही हरी झंडी मिल जाएगी, जिससे सत्र 2026-27 में इन छह विषयों में प्रवेश लेने वाले स्थानीय छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेगी।


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