पीलीभीत UP। जिले की साइबर क्राइम पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ दिखाकर लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने वाले एक बेहद शातिर और सुसंगठित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह सीबीसीआईडी, सीबीआई, ईडी और मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच का फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को डराता था। पीलीभीत पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत छह सदस्यों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 की धारा 3(1) के तहत एफआईआर दर्ज की है, जिससे साइबर अपराधियों के नेटवर्क में भारी हड़कंप मच गया है।
इस सनसनीखेज वारदात की शुरुआत तब हुई जब पीलीभीत के जेल लाइन निवासी पीड़ित जगमोहन सैनी (पुत्र हरीकिशन सैनी) ने पुलिस में बड़ी धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। शातिर अपराधियों ने 9 अगस्त से 22 अगस्त 2024 के बीच पीड़ित को व्हाट्सएप पर वीडियो और ऑडियो कॉल करके खुद को सुप्रीम कोर्ट, सीबीसीआईडी और मुंबई क्राइम ब्रांच का बड़ा अधिकारी बताया। ठगों ने पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे काल्पनिक कानून का भय दिखाया और फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजकर इस कदर डरा दिया कि पीड़ित ने खौफ में आकर ₹57,89,776 इन जालसाजों के विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। इस भारी-भरकम धोखाधड़ी के बाद 21 दिसंबर 2024 को पीलीभीत साइबर क्राइम थाने में धारा 318(4) बीएनएस और 66डी आईटी एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया।
पुलिस की गहन विवेचना में एक विशाल अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ, जिसका मुख्य मास्टरमाइंड और गैंग लीडर ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर निवासी मनीष कुमार (पुत्र प्रेमराज) था। मनीष इस पूरे गिरोह का संचालन कर रहा था। उसके साथ इस काले कारनामे में दिल्ली और नोएडा के रहने वाले पांच अन्य सदस्य—विकास वर्मा (तिमारपुर, दिल्ली), राजेन्द्र शर्मा उर्फ राजन (नोएडा एक्सटेंशन), प्रशान्त चौहान (द्वारिका, दिल्ली), संजय बोबी देशवाल (सेक्टर 126, नोएडा) और फैसल सिद्दीकी (ओखला, साउथ दिल्ली) शामिल थे। ये सभी मिलकर लोगों को शिकार बनाते थे और अवैध कमाई से सुख-सुविधाएं भोगते थे।
पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए निरीक्षक खुर्शीद अहमद के नेतृत्व में पांच आरोपियों को 5 सितंबर 2025 को गिरफ्तार कर लिया, जबकि फैसल सिद्दीकी को निरीक्षक नरेश कुमार त्यागी की टीम ने 24 सितंबर 2025 को पकड़ा। इनके कब्जे से 11 मोबाइल फोन, ₹4 लाख नकद, 13 फर्जी आधार कार्ड, 4 चेकबुक, 2 पासबुक, 3 एटीएम कार्ड और 3 सिम कार्ड बरामद हुए। विवेचना के दौरान मुकदमे में बीएनएस की धारा 337, 338, 308(2) और 319(2) की वृद्धि की गई और 15 अक्टूबर 2025 को न्यायालय में आरोप पत्र संख्या 02/2025 दाखिल किया गया, जो वर्तमान में विचाराधीन है।
समाज में इनके द्वारा फैलाए गए भय को जड़ से खत्म करने के लिए पीलीभीत के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त बैठक में 24 जुलाई 2026 को इस गिरोह का गैंग चार्ट अनुमोदित किया गया। इसी क्रम में 20 अगस्त 2026 को प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र राम भारती की सूचना पर इन सभी छह अभियुक्तों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट का नया मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस की यह कठोर कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है कि आम जनता को लूटने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।