पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद अंतर्गत थाना घुंघचाई क्षेत्र में पासपोर्ट सत्यापन के दौरान सामने आए सनसनीखेज धोखाधड़ी के मामले में पुलिस प्रशासन ने विधिक शिकंजा कस दिया है। एक ही युवक द्वारा अपनी वास्तविक पहचान व जन्मतिथि को छिपाकर कूट रचित दस्तावेजों के सहारे तीन अलग-अलग पासपोर्ट प्राप्त करने के मामले में बरेली क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की शिकायत पर घुंघचाई थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी (सीओ) विधि भूषण मौर्या ने स्थानीय पुलिस को गहनता से साक्ष्य संकलन करने और दोषी के विरुद्ध कठोरतम विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) के आवेदन ने खोला जालसाजी का राज
प्राप्त प्रामाणिक और विधिक जानकारी के अनुसार, घुंघचाई थाना क्षेत्र के ग्राम जमुनिया जगत का रहने वाला सिमर प्रीत नामक युवक विदेश जाने के विधिक प्रयोजन हेतु ‘पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट’ (पीसीसी) के लिए आवेदन किया था। जब पासपोर्ट कार्यालय के तकनीकी विंग ने आवेदक के बायोमेट्रिक और व्यक्तिगत विवरणों का केंद्रीय डेटाबेस से मिलान किया, तो एक अत्यंत चौंकाने वाला विधिक तथ्य प्रकाश में आया। जांच के दौरान यह संज्ञान में आया कि आवेदक सिमर प्रीत पूर्व में भी पूरी तरह से भिन्न जन्मतिथियों और व्यक्तिगत विवरणों के आधार पर दो अन्य वैध पासपोर्ट विधिक रूप से प्राप्त कर चुका है। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के वरिष्ठ अधीक्षक ने इसे देश के पासपोर्ट अधिनियम का घोर उल्लंघन मानते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) पीलीभीत को पत्र प्रेषित कर एफआईआर दर्ज कराने व विस्तृत विधिक आख्या मांगी थी।

वर्ष 2016 से 2023 के मध्य जारी हुए थे तीन अलग-अलग पासपोर्ट
अदालती और पुलिस अभिलेखों के विधिक विवरण के अनुसार, आवेदक सिमर प्रीत के नाम से जारी किए गए तीनों पासपोर्टों में जन्मतिथि का विवरण इस प्रकार कूट रचित पाया गया है:
- प्रथम पासपोर्ट: वर्ष 2016 में बरेली क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से जारी हुआ, जिसमें जन्मतिथि 10 मार्च 1999 अंकित है।
- द्वितीय पासपोर्ट: वर्ष 2023 में लखनऊ क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से जारी कराया गया, जिसमें विधिक जन्मतिथि बदलकर 29 मई 2001 दर्ज की गई।
- तृतीय पासपोर्ट: महज़ कुछ ही महीनों के अंतराल पर 15 दिसंबर 2023 को पुनः जारी कराया गया, जिसमें जन्मतिथि को 19 नवंबर 2002 अंकित कराया गया।
क्षेत्राधिकारी (सीओ) विधि भूषण मौर्या ने बताया कि वरिष्ठ अधीक्षक पासपोर्ट के आधिकारिक पत्र को आधार बनाते हुए घुंघचाई पुलिस ने सुसंगत विधिक धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। स्थानीय इंटेलिजेंस विंग (एलआईयू) और पुलिस की संयुक्त टीमें अब इस बात की गहनता से वैज्ञानिक व विधिक तफ्तीश कर रही हैं कि सिमर प्रीत ने इन कूट रचित शैक्षणिक व आयु प्रमाण पत्रों को कहाँ से तैयार कराया था। साथ ही पूर्व में हुए स्थानीय पुलिस वेरिफिकेशन के स्तर पर हुई विधिक लापरवाही की भी आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है।