बागेश्वर। उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद के उपाध्यक्ष एवं दर्जा राज्य मंत्री भूपेश उपाध्याय ने शनिवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा के खिलाफ कोतवाली बागेश्वर में शिकायत पत्र सौंपा। शिकायत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ कथित तौर पर लगाए गए आरोपों को झूठा बताते हुए संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। इस शिकायत की जानकारी स्थानीय रिपोर्ट में भी प्रकाशित हुई है।
शिकायत पत्र में भूपेश उपाध्याय ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने नेताओं के माध्यम से भाजपा और मुख्यमंत्री धामी की छवि खराब करने का प्रयास कर रही है। पत्र में हाल ही में हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यक्रम के बाद मंच के शुद्धीकरण को लेकर सामने आई चर्चाओं का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता ने पत्र में मुख्यमंत्री धामी की सरकार के जनहित से जुड़े निर्णयों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक षड्यंत्र करने का आरोप लगाया है। ये आरोप शिकायतकर्ता के हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस शिकायत से नहीं होती।

असम मामले का भी किया उल्लेख
शिकायत पत्र में पवन खेड़ा से जुड़े असम के एक अलग कानूनी विवाद का भी उल्लेख किया गया है। अप्रैल 2026 में पवन खेड़ा के खिलाफ असम में प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिसमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश समेत विभिन्न धाराएं लगाई गई थीं। मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी को लेकर खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए दस्तावेजों से जुड़ा था।
इस मामले में गौहाटी हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी कार्यवाही हुई। सुप्रीम कोर्ट ने 30 अप्रैल 2026 को पवन खेड़ा की अपील का निस्तारण करते हुए अग्रिम जमानत से संबंधित कार्यवाही में आदेश पारित किया था।

शिकायत के साथ दस्तावेज भी लगाए
भूपेश उपाध्याय की ओर से दी गई शिकायत के साथ संबंधित वीडियो की पेन ड्राइव, फेसबुक स्क्रीनशॉट के प्रिंट और 1320 मेगावाट विद्युत निविदा से संबंधित दस्तावेज संलग्न किए जाने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ता ने पवन खेड़ा पर चुनावी राज्यों में राजनीतिक लाभ के लिए षड्यंत्र करने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, ये शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप हैं और पुलिस जांच के बाद ही इनके संबंध में कोई निष्कर्ष सामने आएगा।
19 सितंबर 2026 को बागेश्वर से जारी शिकायत में संबंधित धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत करने की मांग की गई है।