​पीलीभीत। जिला पीलीभीत के विकास क्षेत्र ललौरीखेड़ा स्थित कम्पोजित विद्यालय में कार्यरत ४५ वर्षीय दिव्यांग सहायक अध्यापिका मिथलेश कुमारी ने अपनी कड़ी मेहनत और अटूट संकल्प से सफलता की एक नई मिसाल पेश की है। वर्ष २००५ से परिषदीय विद्यालय में अपनी सेवाएँ दे रहीं मिथलेश कुमारी ने विद्यालय और परिवार की ज़िम्मेदारियों को निभाते हुए प्रथम प्रयास में ‘केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा’ व ‘उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा’ तथा द्वितीय प्रयास में ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग – राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा’ (हिन्दी) जैसी कठिन और महत्वपूर्ण परीक्षाएँ उत्तीर्ण की हैं।
​उन्होंने न केवल अपनी व्यक्तिगत योग्यता में वृद्धि की, बल्कि बच्चों के भविष्य को संवारने में भी अद्वितीय योगदान दिया है। उनके कुशल मार्गदर्शन और अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप २१ विद्यार्थियों ने ‘राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति परीक्षा’ में सफलता प्राप्त की। गत वर्ष उनके मार्गदर्शन में ७ विद्यार्थियों द्वारा इस छात्रवृत्ति परीक्षा को उत्तीर्ण करने और शिक्षा क्षेत्र में विशेष योगदान देने के लिए उन्हें राज्य स्तर पर लखनऊ में ‘उत्कृष्ट शैक्षिक सहयोग सम्मान’ से नवाजा गया। इसके अतिरिक्त, जिला स्तर पर जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रोशनी सिंह द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया।
​शिक्षिका मिथलेश कुमारी की यह अद्वितीय उपलब्धि समाज के लिए एक बड़ा संदेश है। उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि बढ़ती उम्र या शारीरिक दिव्यांगता कभी भी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकती। मजबूत हौसलों के आगे हर चुनौती घुटने टेक देती है। उनकी यह प्रेरक जीवन यात्रा समस्त शिक्षकों, विद्यार्थियों और समाज के लिए प्रेरणा का एक अनंत स्रोत है।

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