विधि संवाददाता,पीलीभीत। दहेज हत्या के एक मामले में न्यायालय में अभियोजन कहानी का समर्थन न करने और साक्ष्य के अभाव में सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार ने आरोपी पति, सास और ससुर को दोषमुक्त कर दिया है। इसके साथ ही अदालत में झूठी गवाही (मिथ्या साक्ष्य) देने पर मुकदमे के वादी यानी मृतका के पिता के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू करने का आदेश भी पारित किया गया है।
यह मामला थाना बरखेड़ा क्षेत्र के ग्राम बहादुरपुर हुक्मी का है, जहां के निवासी राधेश्याम ने 29 अप्रैल 2025 को पुलिस को तहरीर दी थी। तहरीर के अनुसार, उनकी पुत्री दीपमाला का विवाह 29 नवंबर 2023 को थाना अमरिया के ग्राम चटिया भैंसहा निवासी मुनेंद्र कुमार के साथ हुआ था। आरोप था कि शादी के बाद से ही पति मुनेंद्र कुमार, सास कौशल्या देवी और ससुर भानु प्रताप उर्फ भजनलाल पांच तोला सोने की चेन व पांच लाख रुपये नकद दहेज की मांग को लेकर दीपमाला का शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न कर रहे थे। परिजनों का कहना था कि 28 अप्रैल 2025 को उन्हें सूचना मिली कि ससुराल वालों ने दीपमाला को जहर दे दिया है। अस्पताल पहुंचने पर दीपमाला ने बताया कि उसे जहर दिया गया है, जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था। हालांकि, न्यायालय में सुनवाई के दौरान वादी राधेश्याम अपने पूर्व बयानों से पलट गए और उन्होंने अभियोजन पक्ष की कहानी का समर्थन नहीं किया। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर मौजूद तथ्यों का अवलोकन करने के बाद पर्याप्त साक्ष्य न होने पर पति, सास और ससुर को बरी कर दिया। इसके साथ ही, अदालत का समय खराब करने और झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने पर वादी राधेश्याम के विरुद्ध अविलंब वैधानिक कार्रवाई संस्थित करने का निर्देश दिया।